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संसद में नॉर्थ-ईस्ट के लिए शिवसेना ने उठाई आवाज…राजनीति नहीं विकास चाहिए – संजय राऊत

• पूर्वोत्तर राज्यों में खुशहाली लाना ही देश की लड़ाई
• भारत के ये राज्य हैं उपेक्षित
• सरकार रोजगार दे, सुरक्षा दे और पर्यटन को दे बढ़ावा

सामना संवाददाता / मुंबई। जम्मू-कश्मीर सहित नॉर्थ-ईस्ट के प्रदेशों को लेकर कल संसद में शिवसेना ने आवाज उठाई। शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत ने राज्यसभा में नॉर्थ-ईस्ट प्रदेशों के पिछड़े हालात और दयनीय स्थिति का विस्तार से उल्लेख करते हुए भारत के इन उपेक्षित राज्यों को मुख्य धारा में लाने और विकास की गति को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि इन सीमावर्ती राज्यों के युवाओं को रोजगार दिया जाए, उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं और पर्यटन के बढ़ावा पर विशेष जोर दिया जाए।
संजय राऊत ने कहा कि विकास के साथ नॉर्थ-ईस्ट के प्रदेशों में आंतरिक सुरक्षा का मसला बेहद अहम है। देश की सुरक्षा में ये राज्य बहुत बड़ा योगदान देते हैं। जब भी देश पर संकट आता है। पहला जख्म उनके शरीर और मन पर पड़ता है। मणिपुर, सिक्किम, नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर की ढांचागत परियोजनाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कश्मीर पर जिस तरह से पाकिस्तान की बुरी नजर है। उसी तरह चीन अरुणाचल प्रदेश पर बुरी नजर रखता है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा मानता है। चीन ने अरुणाचल प्रदेश के १५ स्थानों का नाम भी बदल डाला है। नॉर्थ-ईस्ट के लोग अपने आपको उपेक्षित मानते हैं और भ्रम के साये में जीते हैं। उन पर हमें विशेष ध्यान देना चाहिए। कश्मीर में जब घुसपैठ का मामला आता है तो हम ज्यादा सतर्क हो जाते हैं क्योंकि मसला पाकिस्तान की सीमा का होता है। हिंदुस्थान और पाकिस्तान की राजनीति की जाती है। जब चीन तवांग, असाम और मेघालय में घुसपैठ करता है तो हम उतनी चिंता नहीं करते, जितने कश्मीर के बारे में करते हैं। कश्मीर के युवा बेरोजगारी के कारण आतंकवादी बनते हैं। लेकिन बेरोजगारी की भयावह स्थिति नॉर्थ-ईस्ट के कई प्रदेशों में है। हजारों पढ़े-लिखे युवा देश के कोने-कोने में काम करने जाते हैं। मुंबई और महाराष्ट्र में भी देखते हैं कि बड़े संस्थानों में यहां के होनहार और सुंदर बच्चे काम करते हैं। अरुणाचल प्रदेश में बहुत प्यारी हिंदी बोली जाती है। अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रभक्ति का बहुत बड़ा जज्बा है। नॉर्थ-ईस्ट के प्रदेशों का बजट बढ़ाने की जरूरत है। जो प्रोजेक्ट रुके हैं, उन्हें पूरा करने की जरूरत है। कोहिमा, तवांग जैसे सुंदर-सुंदर शहर हैं। इन सीमावर्ती प्रदेशों में पर्यटन को बढ़ावा देने की जरूरत है। इन सुंदर इलाकों के बारे में हम अनजान हैं। जागरूकता फैलाने की जरूरत है। यदि यहां टूरिज्म बढ़ेंगे तो इकोनॉमी को बल मिलेगा। सड़कों और इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा तो यहां के हालात बेहतर होंगे। नॉर्थ-ईस्ट को सुंदर बनाएं और विकास को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए। ईस्ट-वेस्ट के प्रदेशों को विकास की राह पर ले जाएं। इन प्रदेशों में टूरिज्म बढ़ेगा तो इकोनॉमी बढ़ेगी। ऐसी राजनीति न की जाए कि मणिपुर जीत लिया। मेघालय में भी सरकार बना ली। पूर्वोत्तर राज्यों में शासन की राजनीति नहीं होनी चाहिए। पूर्वोत्तर राज्यों की खुशहाली लाना ही पूरे देश की लड़ाई है।

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