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वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक को कार्य में लापरवाही पड़ी मंहगी, एक वर्ष तक वेतनवृद्धि पर रोक की मिली सजा, अदालत की अनुमति के बिना शुरू की थी जांच

जनमानस में पुलिस की छवि खराब न हो, इसलिए आयुक्त ने की कड़ी कार्रवाई
गलत जवाब देने पर दो पुलिस कांस्टेबलों पर भी हजार रुपए का जुर्माना
चंद्रकांत दुबे / मीरा रोड
मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय अंतर्गत उत्तन सागरी पुलिस स्टेशन के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रशांत लांगी ने अपने काम में लापरवाही बरती और अदालत की अनुमति के बिना एक गैर आरोप योग्य अपराध की गलत जांच की। इसके लिए पुलिस आयुक्त मधुकर पांडे ने वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के वेतनवृद्धि पर एक वर्ष की रोक लगा दी है। साथ ही इसी मामले में गलत बयान देने के लिए तत्कालीन पुलिस उपायुक्त अमित काले के आदेशानुसार, पुलिस कांस्टेबल रवींद्र बागुल और किशोर पाटील पर एक-एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
बता दें कि यह मामला २५ जून २०२१ का है। आरटीआई एक्टिविस्ट कृष्णा गुप्ता को शराब की दुर्गंध आ रही थी और उसके साथीदार के पास लाल रंग की द्रव्य पदार्थ पाई गई जो शराब बताई गई, लेकिन उस दौरान लांगी ने कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि निषेध अधिनियम के तहत उचित धारा में मामला दर्ज किया जाना चाहिए था। इसके उलट सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में केस दर्ज करने की बात कही गई, परंतु लांगी ने ऐसा न करते हुए भादवि १८६ के तहत मामला दर्ज किया था। इस संबंध में सीसीटीएनएस में संज्ञेय अपराध के रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की प्रविष्ट करने की कोई कार्रवाई नहीं की गई तथा इस मामले को गलत तरीके से लिया गया। साथ ही शिकायतकर्ता को कहा गया कि तुम भाग्यशाली हो जो तुम्हें अब तक पीटा नहीं गया तथा अभद्रता पूर्वक व्यवहार किया गया। इस बात की शिकायत गुप्ता ने वरिष्ठ अधिकारियों से की थी। जोन-३ के पुलिस उपायुक्त सुहास बावचे द्वारा की गई जांच रिपोर्ट में यह पाया गया कि तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रशांत लांगी, जो वर्तमान में ट्रैफिक पुलिस विभाग विरार में तैनात हैं, उन्होंने अनुशासनहीनता व गैरजिम्मेदाराना व्यवहार किया है। पुलिस बल को अनुशासित और जनता के मन में पुलिस की छवि खराब की है, ऐसा जांच में पाया गया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट और पुलिस महानिदेशक के आदेश के बावजूद अधिकारियों के हॉल में सीसीटीवी लगाना अनिवार्य है और जब फुटेज की मांग की गई तो फुटेज उपलब्ध नहीं कराया गया। कमरे के बंद सीसीटीवी के बारे में पुलिस डायरी में कोई नोंद नहीं था। हालांकि, पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी के रूप में लांगी पर सीसीटीवी वैâमरे को चालू रखने और उसके फुटेज को सहेजने की जिम्मेदारी थी, लेकिन आदेश का जिम्मेदारी से पालन नहीं किया। अभियोग योग्य अपराध की जांच सीआरपीसी १५५ (२) जो कोर्ट की इजाजत के बिना अवैध तरीके से शुरू किया गया था। लांगी की लापरवाही और अपने कर्तव्यों में शिथिलता के कारण आवेदक गुप्ता को शिकायत करने की गुंजाइश मिल गई, जिससे जनता के मन में पुलिस विभाग की छवि खराब हो रही है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी हैं और कानून तथा सरकारी नियमों की पूरी जानकारी होने के बावजूद उसने लापरवाही बरती है। साथ ही महाराष्ट्र सिविल सेवा (आचरण) नियम, १९७९ के नियम ३ (१) (२) का भी उल्लंघन किया है। विभागीय जांच में लांगी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच के अंत में पुष्टि हुई।
तदनुसार, पुलिस आयुक्त मधुकर पांडे ने महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, १९५१ के नियम २५ (२) के तहत और महाराष्ट्र पुलिस (दंड और अपील) नियम, १९५६ के नियम ३ के तहत वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रशांत लांगी को वर्तमान ट्रैफिक व्यवस्था का कार्यभार सौंपा है तथा सजा के तौर पर एक वर्ष तक वेतनवृद्धि पर रोक लगा दी है।

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