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‘ईडी’ सरकार की लापरवाही : धूल खा रही है ‘बाघोबा’ की फाइल! …बच्चों में वन जीवन और प्रकृति के प्रति रुचि पैदा करनेवाली थी योजना

सामना संवाददाता / मुंबई
मनपा स्कूलों के छात्रों में बाघ और प्रकृति के बारे में अधिक जानकारी देने के लिए पिछली महाविकास आघाड़ी सरकार ने ‘बाघोबा’ नामक एक योजना का प्रस्ताव लाया था। तत्कालीन पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे की अगुवाई में लाया गया यह प्रस्ताव छात्रों के मन में बाघ सहित वन जीवन और प्रकृति के प्रति रुचि पैदा करनेवाला था। बच्चों को पढ़ाने के लिए रानी बाग अर्थात वीर जीजामाता भोसले उद्यान व प्राणी संग्रहालय ने ‘बाघोबा’ का पाठ्यक्रम भी तैयार कर शिक्षा विभाग को सौंप दिया था। लेकिन राज्य में सरकार बदलने के बाद नई ईडी सरकार ने इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है और इससे जुड़ी फाइल मंत्रालय में धूल खा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार तत्कालीन पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने वर्ष २०२२ के मई महीने में बैठक लेकर अधिकारियों को निर्देश दिया था कि पर्यावरण से संबंधित ज्ञान के लिए बच्चों को विशेष पाठ्यक्रम पढ़ाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा था कि जानवरों की जीवनशैली और उनके खाने-पीने व अन्य संबंधित जानकारी बच्चों को जरूर होनी चाहिए। वन्य जीवन के विविध ज्ञान और प्राणी जगत के ज्ञान के लिए विद्यार्थियों को प्रकृति से रू-बरू कराने का लक्ष्य उन्होंने तय किया और बाघोबा योजना की घोषणा की। इस संदर्भ में पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी रानी बाग प्रशासन को दी गई थी। उन्होंने ७ महीने में बाघोबा का पाठ्यक्रम तैयार कर मनपा शिक्षा विभाग को सौंप दिया। वाघोबा योजना को जुलाई महीने में लागू किया जाना था। लेकिन जून महीने में ही सरकार बदल गई और यह फाइल ठंडे बस्ते में चली गई।

इस योजना के माध्यम से छात्रों को पर्यावरणपूरक जीवन पद्धति का ज्ञान दिया जाना था। छात्रों को जंगल सफारी के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से प्राणियों के संपर्क में लाकर उनके भीतर जानवरों के प्रति प्रेम और विश्वास पैदा करना था। उसके साथ ही वृक्षारोपण योजना और स्कूलों में सौर ऊर्जा, कंपोस्टिंग, वाटर हार्वेस्टिंग, कचरा का पुनरुपयोग, सिंचाई परियोजना आदि का ज्ञान दिया जाना था। प्रत्यक्ष रूप से इस संदर्भ में छात्रों को ज्ञान देकर पर्यावरण सुरक्षा और संरक्षण के लिए शिक्षा दिए जाने की योजना थी। इस माध्यम से छात्रों के मन में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति आदर बढ़ाने की यह योजना है। इस प्रकार से नीदरलैंड के स्कूलों में पढ़ाया जाता है। इस मामले में छात्रों को पर्यावरण से सीधे रूबरू करा कर उनके भीतर ज्ञान लाने का प्रयास किया जाता है।

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