मुख्यपृष्ठनए समाचारअग्नि सुरक्षा के प्रति लापरवाही...कोर्ट के आदेश के बाद क्यों जागते हो?

अग्नि सुरक्षा के प्रति लापरवाही…कोर्ट के आदेश के बाद क्यों जागते हो?

-हाई कोर्ट ने मिंधे सरकार की उड़ाई नींद

सामना संवाददाता / मुंबई 

अग्नि सुरक्षा नियमों को लागू करने में ढिलाई बरतने पर हाई कोर्ट ने मिंधे सरकार को फिर से फटकार लगाई है। कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि विशेषज्ञ समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपे हुए दस महीने बीत चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाए गए। क्या कोर्ट के आदेश के बाद ही सरकार को होश आया? क्या आप कोर्ट के आदेश के बाद ही जागते हैं?
टाइमलाइन का पालन करने की चेतावनी 
संवेदनशील इमारतों की अग्नि सुरक्षा को लेकर २००९ में मसुदा विशेष नियम लागू करने के संदर्भ में सरकार को निर्देश देने संबंधी एक याचिका एडवोकेट आभा सिंह ने हाई कोर्ट में दायर की थी। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ के समक्ष हुई। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के शहरी विकास विभाग ने दस महीने में अग्नि सुरक्षा नियमों के संबंध में विशेषज्ञ रिपोर्ट पर निर्णय नहीं लेने पर कोर्ट ने संज्ञान लिया और नगरविकास विभाग के प्रधान सचिव को ४८ घंटे के अंदर यह बताने का आदेश दिया कि अग्नि सुरक्षा नियमों को लागू करने के लिए अधिसूचना कब जारी की जाएगी? तदनुसार, अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने मामले पर बहस की। एडवोकेट चव्हाण ने इस मुद्दे पर कहा कि अग्नि सुरक्षा नियमों के कार्यान्वयन के संबंध में आवश्यक कार्रवायी अगले वर्ष मई तक पूरी की जाएगी और उसके बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि यदि फरवरी में विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर कार्रवाई की गई होती तो अब तक नियम तैयार हो गए होते। कोर्ट ने व्यंगात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि वास्तव में आप कोर्ट द्वारा आदेश दिए जाने के बाद ही जागते नजर आए। कोर्ट ने सरकार को मई २०२४ की टाइमलाइन का सख्ती से पालन करने की चेतावनी भी दी।
मुंबई में अग्निशमन केंद्र, जनशक्ति आंकड़े प्रदान करें!
अदालत ने याचिकाकर्ताओं को मनपा के आयुक्त और मुख्य अग्निशमन अधिकारी को प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया। साथ ही जब तक विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार नियम नहीं बन जाते तब तक आग लगने की स्थिति में त्वरित राहत कार्य कैसे जारी रखा जाए? शहर में कितने फायर स्टेशन हैं? क्या पर्याप्त जनशक्ति है? आग लगने की सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड को मौके पर पहुंचने में कितना समय लगता है? कोर्ट ने नगर निगम प्रशासन को शपथ पत्र के माध्यम से ब्योरा देने का निर्देश दिया। इस मामले में अगली सुनवाई ३० जनवरी को होगी।

 

 

 

 

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