मुख्यपृष्ठस्तंभराजधानी लाइव : नेपाल का हिंदू राष्ट्र बनना, हिंदुस्थान के हित पर...

राजधानी लाइव : नेपाल का हिंदू राष्ट्र बनना, हिंदुस्थान के हित पर सवाल!

डाॅ. रमेश ठाकुर।  नेपाल के प्रधानमंत्री अभी दिल्ली होकर गए हैं, दिल्ली आने का उनका मकसद कुछ खास था। नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग जोरों पर है, जिसमें अप्रत्यक्ष रूप से अब हिंदुस्थान की भी सहमति हो गई है। इसमें हमारा हित शायद इतना ही होगा कि अगर पड़ोसी देश हिंदू राष्ट्र बनता है, तो हमारे यहां उठनेवाली ऐसी मांग को संबल मिलेगा। बहरहाल, अपने यहां का मामला कुछ पेचीदा है, पर नेपाल में रास्ता साफ हैं। क्योंकि वहां के मुस्लिम समुदाय के लोग भी चाहते हैं कि नेपाल हिंदू देश बने। वह अल्पसंख्यक बनकर रहना पसंद करेंगे। बीते सप्ताह जब नेपाली पीएम शेर बहादुर देउबा दिल्ली पहुंचे तो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गंभीरता से इस मसले पर विचार-विमर्श किया। इस काम में कुछ संभावित अड़चने हैं, उसको लेकर भी दोनों नेताओं में बातचीत हुई। हालांकि अड़चनों की वैसे संभावनाएं हैं नहीं? क्योंकि नेपाल की मौजूदा हुकूमत भी इस मांग की पक्षधर है, तभी तो पिछले सप्ताह काठमांडू में आयोजित हुए वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन में उनके पर्यटन मंत्री प्रेम अले ने खुलकर हिंदू राष्ट्र बनाने का समर्थन किया। इस पर उन्होंने कई वाजिब उदाहरण भी पेश किए, कहा मौजूदा संसद सदस्यों में उनके पास दो तिहाई बहुमत है। आगे उन्होंने कहा कि अगर नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने के संबंध में कोई प्रस्ताव आता है तो स्वीकार होगा और उस पर विचार किया जाएगा।
गौरतलब है, अगर नेपाल में ऐसी शुरुआत होती है तो हिंदुस्थान में भी मांग जोर पकड़ने लगेगी। मांग तो वैसे कई वर्षों से गर्म है, लेकिन हिंदुस्थान का माहौल नेपाल से थोड़ा अलग है। हिंदुस्थान के करीब दस राज्य ऐसे हैं, जहां हिंदू अल्पसंख्यक बनने की कगार पर हैं। केरल सहित कई राज्यों में हिंदुओं की संख्या बीते कुछ वर्षों में तेजी से घटी है। इसलिए हिंदुस्थान में आसान नहीं है, जबकि हिंदुस्थान का हिंदू राष्ट्र होना, उसका मूल अधिकार है। वेद-पुराणों में ये बात अंकित भी है कि हिंदुस्थान की धरती से हिंदुओं की उत्पत्ति हुई है। आज देखिए तो भला वो खुद अपने वजूद के लिए तरस रहा है। दरअसल, हिंदुस्थान एक उदारवादी मुल्क है, सबको साथ लेकर चलने में विश्वास करता है। हिंदू राष्ट्र बनाने को लेकर हिंदुस्थान में अगर जनमत संग्रह किया जाए, तो अस्सी फीसदी लोगों की हामी होगी।
नेपाल की करीब ८५ प्रतिशत आबादी अपने मुल्क को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहती है। हालांकि इससे किसी अन्य धर्म को कोई परेशानी नहीं होगी और न ही परेशान करने का कोई मकसद। लेकिन इससे लोगों की अवधारणा जरूर भिन्न हो जाएगी, सांप्रदायिकता का कीड़ा काटने लगेगा। पहाड़ी देश नेपाल की ८५ फीसदी जनसंख्या हिंदू है। सन २००८ से पहले तक वह हिंदू राष्ट्र ही था। नेपाल में राजशाही खत्म होने के बाद संवैधानिक व्यवस्था की नींव पड़ी तो धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के तौर पर उदय हुआ। लेकिन उसके कुछ वर्षों बाद से ही नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग हो रही है। मांग सिर्फ जनता ही नहीं कर रही, वहां के तमाम हिंदू संगठनों के अलावा सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी भी लोकतंत्र की बजाय हिंदू राष्ट्र के समर्थन में है। बस थोड़ा-बहुत अड़ंगा नेपाल कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी लगा सकती हैं। दोनों पार्टियां चाहती हैं कि सभी धर्मों को बराबरी का दर्जा दिया जाए। हालांकि हिंदू राष्ट्र बनने के बाद भी किसी का दर्जा या नागरिकता, धर्म नहीं छिनेगा, सभी बराबर के हकदार ही रहेंगे।
नेपाल में हिंदुओं का बड़ा सुनहरा इतिहास रहा है। देश को एक हिंदू सम्राट द्वारा संचालित किया जाता रहा था। राजशाही हटने के बाद वहां पनपी नई नवेली राजनीतिक पार्टियों ने अपने स्वार्थ के लिए देश का बेड़ा गर्क कर दिया। राजशाही के बाद साम्यवाद से प्रभावित वामपंथी दल सत्ता में आए, तो उन्होंने नेपाल के धार्मिक ढांचे को ही बदल डाला। उन्होंने नेपाल को एक धर्मनिरपेक्ष देश घोषित कर दिया। उन्होंने देश के इतिहास से भी छेड़छाड़ की। ये सब पुष्प दहल प्रचंड के चलते हुआ, जिनके हाथ में देश की बागडोर पहुंच गई थी। लेकिन जैसे ही समय बदला लोगों ने अपनी मांग को बल देकर शोर मचाना शुरू कर दिया। नेपाल में जल्द आम चुनाव होनेवाले हैं, ये मुद्दा इस बार सबसे बड़ा रहनेवाला है। सबसे खूबसूरत बात तो ये है छह-सात साल से खुद नेपाली मुस्लिम हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग नेपाल के लिए कर रहे हैं। उनका दावा है कि वह एक धर्मनिरपेक्ष संविधान की बजाय एक हिंदू राज्य की तह में ज्यादा सुरक्षित हैं। नेपाल में एक बात खुलकर कही जाती है कि कम्युनिस्टों ने हमेशा हिंदुओं का दमन किया। उनकी सत्ता में हिंदुओं को सिर्फ नुकसान ही हुआ। सवाल उठता है क्या ऐसी मांग जोर देकर हिंदुस्थान में उठ सकती है, लेकिन नेपाल के हिंदू राष्ट्र बनने के बाद हिंदुस्थान में गर्माहट जरूर बढ़ जाएगी।
(लेखक राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान, भारत सरकार के सदस्य, राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

(उपरोक्त आलेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। अखबार इससे सहमत हो यह जरूरी नहीं है।)

अन्य समाचार