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छींक रोकने की कभी न करें गलता

सामना संवाददाता / मुंबई

साबित हो सकती है जानलेवा
सांस की नली फटने की रहती है संभावना

छींक आना एक सामान्य बात है। सर्दी लगने पर छींक आ सकती है। कई बार सामान्य स्थिति में भी छींक आ जाती है। कुछ लोग हर समय छींकते रहते हैं। इससे उन्हें गुस्सा भी आता है। अक्सर कुछ लोगों को छींक आना बंद हो जाती है। हालांकि, छींक को रोकना जानलेवा साबित हो सकता है। इससे सांस की नली फटने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में चिकित्सकों ने सलाह दी है कि कोई भी इस तरह की गलती न करें, जो उनके लिए घातक बन जाए।
उल्लेखनीय है कि हमें बचपन से बताया जाता है कि छींक रोकने से दिमाग की नस फट सकती है और कुछ लोगों की आंखें बाहर आ जाएंगी। कई लोग छींक को रोकने की कोशिश करते हैं। लेकिन हाल ही में एक ऐसी घटना हुई है, जिससे पता चलता है कि छींक को रोकने से एक शख्स की सांस की नली ही फट गई है। बीएमजे केस स्टडी के अनुसार, एक व्यक्ति ने छींक को रोकने की कोशिश की, तभी उसकी श्वासनली फट गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह शख्स कार चला रहा था, तभी उसे बुखार आ गया। इसी बीच जब उसे छींक आने लगी तो उसने छींक रोक ली। रिपोर्ट में कहा गया है कि उसे अचानक छींक आ गई, लेकिन उसने अपनी नाक और मुंह दबाकर उसे रोक लिया। छींक का दबाव इतना अधिक था कि उसकी श्वास नली में ०.०८ इंच का छेद हो गया।

इसलिए हुआ ऐसा

चिकित्सकों के मुताबिक, छींक आना एक सामान्य प्रक्रिया है। छींक आना भी खांसी-जुकाम का संक्रामक लक्षण माना गया है। आप जब छींक को रोकते हैं तो जो दबाव बनता है, वह छींक के बाद बननेवाले दबाव से २० गुना अधिक होता है।

फट गई थी मांसपेशियां

उस व्यक्ति का तुरंत एक्स-रे किया गया। गले के एक्स-रे से पता चला कि छींक ने त्वचा के सबसे गहरे ऊतकों के नीचे हवा पंâसा दी थी। उसका कंप्यूटेड टोमोग्राफी और सीटी स्वैâन कराया गया। इसके बाद पता चला कि उसकी तीसरी और चौथी हड्डी के बीच की मांसपेशियां फट गई हैं। इस कारण उसके फेफड़ों व छाती में हवा इकट्ठी हो गई थी।

ठीक होने में लगे पांच दिन

रिपोर्ट्स के मुताबिक उसे काफी दर्द हो रहा था। गर्दन दोनों तरफ सूजी हुई थी। उसे चलने-फिरने में दिक्कत हो रही थी। डॉक्टर ने जांच की तो खट-खट की आवाज आई। इसके बावजूद शख्स को सांस लेने, निगलने और बोलने में कोई दिक्कत नहीं हुई। परंतु उसका अपनी गर्दन की गति पर कोई नियंत्रण नहीं था। उसका इलाज दर्द निवारक दवाओं से किया गया। और उसे पूरी तरह ठीक होने में पांच दिन लग गए।

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