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अंडरग्राउंड मेट्रो की नई डेडलाइन : मेट्रो तीन का ६% काम अब भी अधूरा

सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई की यातायात व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सरकार की ओर से मुंबई में मेट्रो लाइन बिछाई जा रही है। अलग-अलग फेज में इसका काम शुरू है। इन सभी में सबसे महत्वपूर्ण कुलाबा से बांद्रा बीकेसी होते हुए सीप्ज तक मेट्रो लाइन-३ है। यह पूरी तरह से अंडरग्राउंड मेट्रो परियोजना है। यही वजह है कि यह उत्साह और रोमांच भर देनेवाली परियोजना है। आम जनता के लिए इस परियोजना का पहला फेज बांद्रा बीकेसी से सीप्ज के बीच दिसंबर २०२३ तक यातायात के लिए शुरू किया जाएगा और अगला फेज बांद्रा से कुलाबा यानी एक साल बाद २०२४ में शुरू किया जाएगा। मुंबई मेट्रो-३ परियोजना के प्रोजेक्ट प्रमुख सुबोध कुमार गुप्ता ने यह जानकारी दी। बता दें कि पहले यह परियोजना जून २०२१ में ही पूरा करने का लक्ष्य था लेकिन बाद में इसकी डेडलाइन मार्च २०२२ तक बढ़ा दी गई। अब इसे फिर से बढ़ाकर दिसंबर २०२३ कर दिया गया है, जबकि अगला फेज बांद्रा से कुलाबा को पूरा करने की डेडलाइन एक साल बाद २०२४ में है।
गुप्ता के अनुसार दिसंबर २०२३ में लोग मेट्रो लाइन-३ के फेज एक के शुरू होने के बाद यात्रा का लाभ ले सकेंगे और दूसरे फेज बांद्रा से कोलाबा तक दिसंबर २०२४ को यात्रियों के लिए शुरू कर दिया जाएगा। इस परियोजना में कुल २७ स्टेशन हैं, जिनमें २६ अंडरग्राउंड स्टेशन हैं। कुल ३३.५ किमी लंबी पूरी तरह अंडरग्राउंड यह परियोजना नरीमन प्वाइंट, कफ परेड, लोअर परेल, बीकेसी, सीप्ज जैसे कई इलाकों से होकर गुजर रही है। इस मार्ग के आसपास लगभग ३० शिक्षा संस्थान, १३ अस्पताल, १४ धार्मिक स्थान और ३० से ज्यादा बिजनेस पार्क हैं। इसके माध्यम से दक्षिण मुंबई से एयरपोर्ट पहुंचने के लिए लोगों को काफी आसानी होगी। इस परियोजना में काम करने के लिए १५,००० वर्कर लगे हुए हैं, जबकि इसके संचालन के लिए २००० लोग लगेंगे।
सेफ्टी नियमों का पूरा पालन
इस परियोजना के निर्माण के दौरान सेफ्टी नियमों का पूरा पालन किया गया है। इसके साथ ही यहां यात्रियों के लिए अलग-अलग सेफ्टी सिस्टम बनाए गए हैं। जहां एक ओर बिजली कट जाने की व्यवस्था पर हैवी जनरेटर लगाए गए हैं, तो वहीं दूसरी ओर आग लगने की स्थिति में निकासी के लिए सेफ्टी सीढ़ियां बनाई गई हैं। धुएं की निकासी के लिए बड़े एग्जॉस्टिंग पैâन लगाए गए हैं, जो सेंसर से कनेक्ट हैं। इतना ही नहीं, अंडरग्राउंड मेट्रो रेल लाइन के आगे भी बीच-बीच में निकासी के लिए सीढ़ियां बनाई गई हैं। सुरंग की सतह को आधुनिक तकनीकी से कंक्रीटाइज किया गया है। भूकंप आने की स्थिति में भी सुरंग पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
सीप्ज स्टेशन का काम ९०% पूरा
कुलाबा से सीप्ज की तरह आते समय एमआईडीसी २५वां स्टेशन है। इसका लगभग ९० प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। यह स्टेशन मरोल इंडस्ट्रियल इस्टेट, चकाला इंडस्ट्रियल इस्टेट, कोंडिविटा आदि और इसके आस-पास के क्षेत्रों के लिए ये उपयोगी होगा। साथ ही यह सेवा बीएमसी, एमसीजीएम मार्वेâट, ईएसआईसी उप-क्षेत्रीय कार्यालय, पासपोर्ट सेवा केंद्र अंधेरी, सेवन हिल्स अस्पताल, भारतीय मानक कार्यालय ब्यूरो, आकृति व्यापार केंद्र जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के लिए उपलब्ध होगी।
सबसे बड़ा अंडरग्राउंड स्टेशन
एमआईडीसी मेट्रो-३ रूट पर रूफ वर्क, पाइलिंग प्रोसेस, कॉनकोर्स स्लैब और बेस स्लैब वर्क को पूरा करनेवाला पहला स्टेशन बन गया है। इस स्टेशन में ४ प्रवेश और निकास, ९ एस्केलेटर और ५ लिफ्ट हैं। अंधेरी में वाणिज्यिक केंद्रों, कार्यालय के ऊंचे भवनों में एमआईडीसी मेट्रो स्टेशन के माध्यम से यातायात के लिए आसानी होगी। इस मेट्रो स्टेशन की कुल लंबाई लगभग २४० मीटर है। इसकी गहराई २१.५ मीटर है, चौड़ाई २४ है।
पैकेज ७ के अन्य स्टेशनों में सीप्ज और मरोल नाका भी शामिल हैं। यहां अब तक कुल ९४.७ प्रतिशत निर्माण और ७६.८ प्रतिशत सिस्टम का काम पूरा किया जा चुका है।

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