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जामा मस्जिद-नीलकंठ महादेव मंदिर मामले में नया मोड़ …बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने किया दावा!

सामना संवाददाता / बदायूं
ज्ञानवापी की तरह बदायूं की जामा मस्जिद शम्सी की जगह नीलकंठ महादेव मंदिर होने का दावा किए जाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। अब बौद्ध धर्म के अनुयायियों की ओर से जामा मस्जिद को अपनी संपत्ति बताते हुए दावा किया गया है। अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से सिविल कोर्ट सीनियर डिवीजन की अदालत में दायर की गई याचिका पर कल सुनवाई हुई। याचिका में दावा किया गया है कि जामा मस्जिद की जगह नीलकंठ महादेव का मंदिर था, जिसे क्षतिग्रस्त कर मस्जिद का निर्माण कराया गया है। सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में वादी पक्ष और जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखा। इसी बीच बौद्ध धर्म के अधिवक्ता की ओर से आवेदन दिया गया है कि जामा मस्जिद शम्सी की जगह बौद्ध धर्म की जगह है। अभी अगली तारीख तय नहीं हुई है।
मुस्लिम पक्ष ने खंगाला इतिहास
हिंदू महासभा की ओर से कुछ सरकारी किताबों समेत इतिहास को आधार बनाते हुए दावा पेश किया गया। इसमें स्पष्ट है कि आक्रांताओं ने राजा महीपाल के किले की प्रकृति परिवर्तित की। मुस्लिम पक्ष ने भी अपने स्तर से इतिहास खंगालना शुरू कर दिया, ताकि यह साबित किया जा सके कि वहां मस्जिद काफी प्राचीन है। इसके साथ अन्य अभिलेख भी जुटाए गए हैं, जिन्हें अदालत के सामने रखा जाएगा।

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