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५ कारणों से अलग हुए नीतीश? नड्डा का बयान नड़ा : फैसला लेने की नहीं थी स्वतंत्रता

  • विधानसभा अध्यक्ष से थे नाराज
  • मित्र मिटाओ नीति से हुए सतर्क 
  • लगातार सबूत लग रहे थे हाथ

सामना संवाददाता / पटना
बिहार में विधानसभा चुनाव के महज ढाई साल बाद ही भाजपा और जदयू गठबंधन में दरार आ गई। सीएम नीतीश कुमार ने एक बार फिर एनडीए में सम्मान न मिलने की बात कह कर गठबंधन से बाहर निकलने का एलान किया। पांच साल में यह दूसरी बार है, जब नीतीश कुमार ने पाला बदलने का एलान किया है। इस बीच यह जानना अहम है कि आखिर नीतीश कुमार को यह फैसला लेने पर मजबूर क्यों होना पड़ा है? ऐसी क्या वजहें थीं कि पांच साल पहले भाजपा के साथ आने का एलान करने वाले नीतीश कुमार ने फिर से गठबंधन तोड़ने का एलान कर दिया? इसके अलावा गठबंधन के टूटने के जदयू की तरफ से भाजपा को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है? बिहार में भाजपा और जेडीयू का गठबंधन टूटने के बाद नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो चुका है। मंगलवार की शाम को नीतीश कुमार ने राज्यपाल फागू चौहान को १६४ विधायकों के समर्थन की चिट्ठी सौंपी। इस मौके पर तेजस्वी यादव भी उनके साथ राजभवन में मौजूद थे। तेजस्वी ने कहा कि भाजपा का कोई गठबंधन सहयोगी नहीं है, इतिहास बताता है कि भाजपा उन दलों को नष्ट कर देती है जिनके साथ वह गठबंधन करती है। हमने देखा कि पंजाब और महाराष्ट्र में क्या हुआ?
जेपी नड्डा के बयान पर मची हलचल
१० दिन पहले यानी ३१ जुलाई को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के एक बयान ने भी बिहार की राजनीतिक हलचल को बढ़ा दिया था। उस दिन नड्डा बिहार में पार्टी के कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेने पहुंचे थे। यहां उन्होंने कहा था कि भविष्य में स्थानीय पार्टियों का अस्तित्व ही नहीं बचेगा। नड्डा ने कहा था, ‘मैं बार-बार कहता हूं कि देखो अगर ये विचारधारा नहीं होती तो हम इतनी बड़ी लड़ाई नहीं लड़ सकते थे। सब लोग (अन्य राजनीतिक दल) मिट गए, समाप्त हो गए और जो नहीं हुए वे भी हो जाएंगे। रहेगी तो केवल भाजपा ही रहेगी। भाजपा के विरोध में लड़ने वाली कोई राष्ट्रीय पार्टी बची नहीं। हमारी असली लड़ाई परिवारवाद और वंशवाद से है।
आरसीपी ने भाजपा से बढ़ाई करीबी
हालिया घटनाक्रमों और भाजपा की मंशाओं को लेकर नीतीश के शक पर मुहर लगाई आरसीपी सिंह और भाजपा की बढ़ती करीबियों ने। दरअसल जब जदयू ने केंद्र सरकार में वैâबिनेट में जगह लेने से इनकार कर दिया था, तब भी नीतीश के करीबी रहे आरसीपी सिंह इस्पात मंत्री बने। माना जाता है कि केंद्र में रहते हुए आरसीपी ने भाजपा से करीबी काफी बढ़ाई। इसके बाद ही नीतीश को उनसे खतरा महसूस होने लगा था। हालांकि, इसके बावजूद नीतीश कुमार को आरसीपी सिंह पर पार्टी में टूट पैदा करने का शक था। इन खतरों से निपटने की तैयारी भी नीतीश ने इस साल की शुरुआत में ही कर दी थी, जब जदयू ने आरसीपी के करीबी चार नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
राजतिलक की करो तैयारी,आ रहे हैं लालटेन धारी
बिहार की गरम रातनीतिक परिवेश के बीच लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने ट्विटर पर बड़ा संकेत देते हुए ट्वीट किया है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक बड़ा सांकेतिक ट्वीट किया है। गाने के बोल थे लालू बिना चालू ई बिहार ना होई… इस गाने को ट्वीट करके रोहिणी राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है, वहीं कैप्शन ने बहुत कुछ साफ कर दिया है।
शिंदे, सिंधिया, पायलट प्रकरण से सबक
नीतीश के लिए जदयू को एनडीए गठबंधन से अलग करने का फैसला कठिन साबित होने वाला था। हालांकि महाराष्ट्र में पिछले दो महीनों में हुए पूरे घटनाक्रम ने नीतीश को और ज्यादा सतर्क करने का काम किया है। दरअसल नीतीश को शक था कि भाजपा महाराष्ट्र की तरह ही बिहार में भी खेल करने की कोशिश करेगी। नीतीश को आशंका थी कि महाराष्ट्र में भाजपा ने सरकार बनाने के लिए शिवसेना में ही बगावत पैदा करा दी और पार्टी के दो टुकड़े में बांट दिया। उसी तरह भाजपा जदयू खेमे में भी दरार डाल सकती है।

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