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धार न आधार फिर भी गुमान! भाजपा के आंदोलन से सहमत नहीं किसान, राजनीतिक साजिश की खुल रही पोल

विनय यादव / मुंबई। महाराष्ट्र सरकार वित्तीय संकटों के बावजूद किसानों के हित में बड़े पैमाने पर काम कर रही है। इस वर्ष के बजट में कृषि क्षेत्र और किसानों को प्राथमिकता दी गई है। बावजूद इसके भाजपा समर्थित संगठन और किसान राज्य सरकार के विरोध में उतर रहे हैं। हालांकि भाजपा के इस विरोध को किसानों ने हल्के में लिया है और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में चल रही सरकार पर भरोसा जताया है।
दरअसल हुआ यूं कि भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर और सदाभाऊ खोत ने गन्ना एफआरपी की एकमुश्त राशि किसानों को भुगतान करने की मांग को लेकर विधान भवन परिसर में आंदोलन किया। इस दौरान गन्ने का डंठल लाया गया और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। मांग की गई कि किसानों को १४ दिनों के भीतर एकमुश्त एफआरपी मिले और ५० हजार रुपए की सब्सिडी उन्हें दी जाए अन्यथा आंदोलन तीव्र किया जाएगा। यहां सवाल उठता है कि सुप्रीम कोर्ट के पैâसले के अनुसार जब कृषि कानून को लेकर ८६ प्रतिशत संगठन खुश हैं तो परेशानी कहां है? आखिर देशभर के किसान राष्ट्रीय स्तर पर परेशान क्यों हैं? किसान सभा के नेता अजीत नवले ने कहा कि किसानों के विरोध के कारण ही केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े हैं। ८६³ संगठन कृषि कानून से खुश हैं, इस रिपोर्ट से हम सहमत नहीं हैं। कृषि कानून का वही समर्थन कर रहे हैं, जो पूंजीपतियों के साथ हैं। महाराष्ट्र में गन्ना किसानों को लेकर भाजपा के सियासी आंदोलन के साथ हम नहीं हैं। पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार में किसानों के साथ क्या हुआ और कौन- सा न्याय दिया गया? सबने देखा है। गन्ना किसानों के मुद्दे को लेकर हम जल्द शक्कर आयुक्त से मुलाकात कर मसले का हल निकालने की कोशिश करेंगे।
३१.७३ लाख किसान कर्जमुक्ति
कर्ज में डूबे किसानों को उबारने के लिए राज्य सरकार ने महात्मा ज्योतिराव फुले किसान कर्जमुक्ति योजना का बड़े पैमाने पर लाभ दिया है। राज्य में ३१.७३ लाख किसान लाभान्वित हुए हैं। राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात स्पष्ट कर चुके हैं कि महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष २०१९ में किसानों के २ लाख रुपए तक का कर्ज माफ करने का एलान किया था। कर्जमुक्ति योजना के तहत अब तक ३१.७३ लाख किसानों को कर्ज मुक्ति का लाभ दिया गया है। इसके लिए सरकार ने २०२५० करोड़ रुपए किसानों में वितरित किया गया है। धान उत्पादक किसानों का बकाया ६०० करोड़ रुपए तत्काल वितरित करने की घोषणा राज्य सरकार ने सोमवार को ही की है।

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