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चीनी राखी को `नो चांस’! …रक्षाबंधन पर चीन को ७ हजार करोड़ की चपत

• जमकर हुआ भारतीय राखी का व्यापार
नागमणि पांडेय / मुंबई
भारतीय बाजार में एक के बाद एक कई झटके चीन को मिल रहे हैं। ऐसे में इस वर्ष भी रक्षाबंधन के त्योहार पर चीन को बड़ा आर्थिक झटका लगा है। भारत ने चीन को ७ हजार करोड़ का आर्थिक झटका दिया है। राखी पर चीनी राखी को `नो चांस’ मिला, जबकि भारतीय राखी का व्यापार जमकर हुआ। आगे भी चीन को झटका देने के लिए ऐसी ही दीवाली और दूसरे त्योहारों पर भी चीन के सामानों को नहीं लाने का फैसला लेने की जानकारी कैट के मुंबई अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने दी।

देश में रक्षाबंधन का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस वर्ष ये त्योहार दो दिन मनाया जा रहा है। भाई-बहन के इस पवित्र त्योहार के अवसर पर भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए बहनें बाजार से खरीदारी करती हैं। इस वर्ष इस मौके पर मुंबई सहित देश भर के व्यापारियों और लोगों ने किसी भी प्रकार की चीनी राखी का उपयोग करने की बजाय `भारतीय राखी’ का विकल्प चुनकर चीन के राखी व्यापार को तगड़ा झटका दिया।

वैदिक राखी का भी उपयोग
शंकर ठक्कर ने बताया कि व्यावहारिक रूप से इस वर्ष चीनी राखी की कोई मांग ही नहीं थी और पूरे देश के बाजारों में केवल भारतीय राखी की ही बहुत मांग थी। लोगों के इस बदलते रुख से यह अंदाजा लगाना बेहद सहज है कि धीरे-धीरे भारत के लोग अपने दैनिक जीवन में चीनी सामानों के उपयोग नहीं के बराबर कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पूरे देश में लगभग ७ हजार करोड़ का राखी का व्यापार हुआ। भारतीय त्योहारों के गौरवशाली अतीत को पुन: प्राप्त करने की दृष्टि से वैâट ने लोगों से `वैदिक राखी’ के उपयोग का भी आह्वान किया, जिससे भारत की प्राचीन संस्कृति और राखी त्योहार की पवित्रता को पुनर्जीवित किया जाए।

चीन पर निर्भरता हुई कम
वैâट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि हर त्योहार देश की पुरानी संस्कृति और सभ्यता से जुड़ा हुआ है। ये तेजी से पश्चिमीकरण के कारण बहुत नष्ट हो गया है इसलिए भारत के सांस्कृतिक मूल्यों को फिर से स्थापित करने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए और चीन पर भारत की निर्भरता को कम करके भारत को एक आत्मनिर्भर देश बनाना बेहद जरूरी है। वह समय चला गया है, जब भारतीय लोग चीनी राखी की डिजाइन और लागत प्रभावी होने के कारण उसको खरीदने के लिए उत्सुक रहते थे। समय और मानसिकता के परिवर्तन के साथ लोग अब स्थानीय उत्पादित राखी को ही ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

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