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तीन पीढ़ियों से नहीं नहर में पानी!… कागजों पर हर साल होता है मरम्मत का कार्य

सामना संवाददाता / बेतिया । बिहार सरकार हर हाथ को काम और हर खेत को पानी देने की भले ही दावा करती हो लेकिन बेतिया के चनपटिया प्रखंड के महना कुली पंचायत में यह दावा कागजों तक ही सिमटा है। इस पंचायत क्षेत्र से बहने वाली एक नहर में दशकों से किसानों को पानी का इंतजार है। ग्रामीणों के मुताबिक इस नहर के पानी के इतंजार में कई पीढ़ियां गुजर गई। लेकिन आज तक नहर में पानी नहीं दिखा। हालांकि अभियंता शशि कुमार का दावा है कि नहर में हर साल पानी आता है।
खेत में मिला नहर का हिस्सा
इंजीनियर शशि कुमार ने बताया कि हर साल नहर की मरम्मत होती है। पानी भी आता है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि मरम्मत भी सिर्फ कागजों पर ही है। किसानों ने बताया कि पानी नहीं आने की वजह से ही लोगों ने नहर के कुछ हिस्से को खेत में मिला लिया है। कहीं नहर पर रास्ते बना दिए गए हैं। पानी नहीं आने की वजह से ही ऐसा हुआ है। सरकार ने १९७४-७५ में इस नहर का निर्माण कराया था।
खेतों तक नहीं पहुंचा पानी
बता दें कि इस नहर के जरिए आज तक खेतों तक पानी नहीं पहुंचा। इस नहर के पानी की आस में किसानों की तीन पीढ़ियां टकटकी लगाई हुई है। लेकिन अब तक निराशा ही हाथ लगी है। यह नहर चनपटिया प्रखंड में मुशहरी सबमाइनर जैतिया वितरणी के दक्षिण छोर वैâथवलिया के समीप से निकलती है। इसके बाद  कैथवलिया, लगुनाहा, मुशहरी, सेमुआपुर से होकर गुजरती है।
बारिश पर निर्भर है खेती
नहर में वर्षों से पानी नहीं आने के कारण सैकड़ों एकड़ भूमि की सिंचाई भगवान भरोसे या फिर पंपिंग सेंटों पर निर्भर है। नहर सूखी होने के कारण कहीं-कहीं तो नहर का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। सरकारी फाइलों में सिर्फ यह दर्ज है। लेकिन अधिकारी भी यह जानकर हैरान है। इसके निर्माण पर कितनी राशि खर्च हुई है। इसका आंकड़ा नहीं मिल पाया है।

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