मुख्यपृष्ठसमाचारडोंबिवली के उत्तर भारतीय श्रीकांत शिंदे से हुए नाराज

डोंबिवली के उत्तर भारतीय श्रीकांत शिंदे से हुए नाराज

-भुगतना पड़ेगा लोकसभा चुनावों में खामियाजा

सामना संवाददाता / मुंबई

उत्तर भारतीयों का हितैषी बताने वाले कल्याण के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे से डोंबिवली के उत्तर भारतीय काफी नाराज हैं, जिसके चलते आने वाले लोकसभा चुनाव उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ेगा। यानी उत्तर भारतीयों का मत मिलना टेढ़ी खीर दिखाई दे रहा है।
बता दें कि डोंबिवली-पूर्व के प्रकाश विद्यालय में पिछले दिनों हिंदी भाषी समाज द्वारा एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में सांसद श्रीकांत शिंदे के साथ कई हिंदी भाषी संस्थाओं के संस्थापक अध्यक्षों के साथ संवाद आयोजित किया गया था। इस संवाद कार्यक्रम के लिए कल्याण के सांसद शिंदे ने अपने आने की घोषणा भी की थी। परंतु घंटों इंतजार के बाद भी सांसद शिंदे नहीं आए। काफी देर बाद शिंदे गुट के नेता महेश पाटील ने डॉ. शिंदे के न आने की सूचना दी। डॉ. शिंदे के न आने की सूचना मिलने के बाद हिंदी भाषी संस्थाओं के पदाधिकारियों ने इसे अपना अपमान महसूस किया और इसको लेकर उनमें नाराजगी छा गई। सांसद श्रीकांत शिंदे द्वारा हिंदी भाषी समाज की उपेक्षा का आलम यह रहा कि वह डोंबिवली में रहकर भी तय कार्यक्रम में नहीं पहुंचे, जिससे नाराज होकर तमाम हिंदी भाषी संस्थाओं के पदाधिकारियों ने खुद को ठगा हुआ महसूस करते हुए कहा कि सांसद श्रीकांत शिंदे तमाम हिंदी भाषी संस्थाओं को सिर्फ अपने मतलब के लिए इस्तेमाल करते हैं। हिंदी भाषियों को शिंदे अपना वोट बैंक बनाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं, लेकिन इस घटना के बाद समस्त हिंदी भाषी समाज एकजुट होकर श्रीकांत शिंदे को आगामी लोकसभा में सबक अवश्य सिखाएगा।
आयोजकों का कहना था कि समय देकर कार्यक्रम में न आने वाले सांसद को इस बार संसद में भेजने की बजाय घर पर बैठाया जाएगा। कुल मिलाकर डोंबिवली के हिंदी भाषी समाज की एकजुटता अगर कायम रही तो इस बार लोकसभा चुनावों में श्रीकांत शिंदे की हालत पतली होना तय है।

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