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रखवाले नहीं देशद्रोही हो, मणिपुर में `भारत मां’ को मारा है! राहुल गांधी का धमाकेदार संबोधन, संसद में रिएंट्री के बाद सत्तापक्ष को जमकर लताड़ा

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर चल रही चर्चा में कल अहम दिन था। अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संबोधित किया। राहुल गांधी ने रिएंट्री के बाद अपने धमाकेदार संबोधन में सत्ता पक्ष को जमकर लताड़ा। राहुल गांधी ने कहा, `स्‍पीकर साहब, सबसे पहले मैं आपका धन्‍यवाद करना चाहता हूं कि आपने मुझे लोकसभा में रीइंस्‍टेट किया। पिछली बार जब मैं बोला तो शायद मैंने आपको थोड़ा कष्‍ट भी पहुंचाया। क्‍योंकि मैंने इतनी जोरों से अडानी जी पर फोकस किया कि जो आपके सीनियर नेता हैं। शायद उनको थोड़ा कष्‍ट हुआ। तो वो जो उनको कष्‍ट हुआ, उसका असर शायद आप पर भी थोड़ा हुआ। तो इसके लिए मैं आपसे माफी मांगता हूं, मगर मैंने सिर्फ सच्‍चाई रखी थी।
मगर आज जो मेरे भाजपा के मित्र हैं, आज आपको डरने की जरूरत नहीं है, क्‍योंकि आज जो मेरा भाषण है…. आज कोई घबराने की जरूरत नहीं है। आज मैं अडानी जी पर नहीं बोलने जा रहा हूं। तो आप रिलैक्‍स कर सकते हैं, आप शांत रह सकते हैं क्‍योंकि मेरा भाषण आज दूसरे डायरेक्‍शन में जा रहा है।
रूमी ने कहा था ‘जो शब्‍द दिल से आते हैं, वो शब्‍द दिल में जाते हैं।’ तो आज मैं दिमाग से नहीं बोलना चाह रहा हूं, मैं दिल से बोलना चाह रहा हूं। मैं आज आप लोगों पर इतना आक्रमण नहीं करूंगा… मतलब एक-दो गोले जरूर मारूंगा, मगर इतना नहीं मारूंगा। तो आप रिलैक्‍स कर सकते हैं।पिछले साल १३० दिन के लिए मैं भारत के एक कोने से दूसरे कोने तक गया। मैं अकेला नहीं, बहुत सारे लोगों के साथ था। मैं समुद्र के तट से कश्‍मीर की बर्फीली पहाड़ियों तक चला…(भाजपा सदस्यों की टीका-टिप्पणी के बीच कहा)… नहीं, लद्दाख को मैंने नहीं छोड़ा। यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है, यात्रा जारी है और जरूर लद्दाख आएंगे, घबराइए मत।
बहुत सारे लोगों ने मुझसे पूछा यात्रा के दौरान, यात्रा के बाद कि राहुल तुम क्‍यों चल रहे हो? तुम्‍हारा लक्ष्‍य क्‍या है? कन्‍याकुमारी से कश्‍मीर तक क्‍यों जा रहे हो? और वो जब मुझसे पूछते थे, शुरुआत में मेरे मुंह से जवाब नहीं निकलता था। शायद मुझे ही नहीं मालूम था कि मैंने ये यात्रा क्‍यों शुरू की।
जब मैं कन्‍याकुमारी से शुरू हुआ, मैं सोच रहा था मैं हिंदुस्थान को देखना चाहता हूं, समझना चाहता हूं, लोगों के बीच में जाना चाहता हूं… मगर गहराई से मुझे मालूम नहीं था। थोड़ी ही देर में मुझे बात समझ आने लगी। जिस चीज से मुझे प्‍यार था, जिस चीज के लिए मैं मरने को तैयार हूं, जिस चीज के लिए मैं, मोदी जी की जेलों में जाने को तैयार हूं, जिस चीज के लिए मैंने १० साल हर रोज गाली खाई है, उस चीज को मैं समझना चाहता था ये है क्‍या… जिसने मेरे दिल को इतनी मजबूती से पकड़ रखा था, उसको मैं समझना चाहता था।
शुरुआत में जैसे मैंने शुरू किया… सालों से मैं हर रोज ८-१० किलोमीटर दौड़ता हूं… तो मेरे दिमाग में था कि अगर मैं १० किलोमीटर दौड़ सकता हूं तो २५ किलोमीटर चलना कोई बड़ी बात नहीं है… ये मैंने सोचा था।
आज मैं उस भावना को देखूं तो वो अहंकार था कि मैं ये कर सकता हूं, ये कुछ नहीं है… तो मेरे दिल में उस समय अहंकार था मगर भारत अहंकार को एकदम मिटा देता है, एक सेकंड में मिटा देता है। तो हुआ क्‍या कि २-३ दिन में मेरे घुटने में दर्द शुरू हो गया, पुरानी इंजरी थी और जबरदस्‍त दर्द…हर रोज मैं उठूं और मेरे घुटने में दर्द, हर कदम में दर्द…तो पहले २-३ दिनों में जो अहंकार था… जो मतलब भेड़िया जो निकला था, वो चींटी बन गई एकदम। जो हिंदुस्थान को अहंकार से देखने निकला था, वो पूरा का पूरा अहंकार गायब हो गया और रोज मैं डर-डर के चलूं कि क्‍या मैं कल चल पाऊंगा। ये मेरे दिल में डर था और जब भी ये डर बढ़ता था, कहीं न कहीं से, कोई न कोई शक्ति मेरी मदद कर देती थी।
एक दिन मैं सह नहीं पा रहा था, एक छोटी-सी लड़की आती है, मुझे चिट्ठी दे देती है। मैंने चिट्ठी खोली, ८ साल की (लड़की) थी। उसने लिखा था Rahul, I am walking with you, don’t worry/ उसने मेरे पैर में चोट देखी और उसने अपनी शक्ति मुझे दे दी। सिर्फ उसने नहीं, लाखों लोगों ने… और शुरुआत में जब मैं चल रहा था, कोई किसान आता था, मैं एकदम उसको… पहले उसको अपनी बात बताता था कि आपको ये करना चाहिए, आपको इस प्रकार से काम करना चाहिए। मगर इतने लोग आए, हजारों लोग आए कि थोड़ी देर में मैं बोल नहीं पाया।
जो मेरे दिल में बोलने का डिजायर था, वो बंद हो गया। बोल ही नहीं पाया क्‍योंकि इतने लोगों से बोलना था और एक सन्नाटा सा छा गया… भीड़ की आवाज थी–`भारत जोड़ो’, `भारत जोड़ो’, `भारत जोड़ो’ और जो मुझसे बात करता था, उसकी आवाज मैं सुनता गया। हर रोज सुबह ६ बजे से रात ७-८ बजे तक आम आदमी, गरीब, अमीर, बिजनेसमैन, किसान, मजदूर… सबकी आवाज। तो ये चलता गया, मैं बात सुनता गया और फिर मेरे पास एक किसान आया और किसान ने हाथ में रूई पकड़ी हुई थी और उसने मुझे वो रुई का बंडल दिया और उसने मेरी आंख में देखकर कहा – राहुल जी, यही बचा है मेरे खेत का, मेरे खेत का यही बचा है और कुछ बचा नहीं है। मैंने उससे जो मैं नॉर्मली सवाल पूछता था- भइया आपको बीमा का पैसा मिला… वो पूछा… और किसान ने मेरा हाथ पकड़ा, किसान मुझे कहता है कि नहीं राहुल जी, मुझे बीमा का पैसा नहीं मिला, हिंदुस्‍थान के बड़े उद्योगपतियों ने वो मुझसे छीन लिया। मगर इस बार बड़ी अजीब सी चीज हुई। जब मैंने किसान को देखा और वो मुझसे बोल रहा था तो जो उसके दिल में दर्द था, वो मेरे दिल में आया। जो उसकी आंखों में शर्म थी, वो शर्म मेरी आंखों में आई। उसकी जो भूख थी, वो मुझे समझ में आई। उसकी जो पीड़ा थी, वो मुझे समझ आई और उसके बाद यात्रा बिल्‍कुल बदल गई। मुझे भीड़ की आवाज नहीं सुनाई देती थी। मुझे सिर्फ उस व्यक्ति की आवाज सुनाई देती थी, जो मुझसे बात कर रहा था। उसका दर्द, उसकी चोट, उसका दुख… मेरा दुख, मेरी चोट, मेरा दर्द बन गया।
अपने सपने को हमें परे करना पड़ेगा
भाइयों और बहनों, लोग कहते हैं कि ये देश है… कोई कहता है ये अलग-अलग भाषाएं हैं, कोई कहता है ये जमीन है, मिट्टी है… कोई कहता है ये धर्म है, ये सोना है, ये चांदी है… मगर भाइयों और बहनों, ये सच्चाई है कि ये देश एक आवाज है। ये देश, सिर्फ एक देश के लोगों की आवाज है… इस देश के लोगों का दर्द है, दुख है, कठिनाइयां हैं और अगर हमें इस आवाज को सुनना है तो हमारे दिल में जो अहंकार है, हमारे जो डिजायर हैं, हमारे जो सपने हैं, उनको हमें परे करना पड़ेगा। जब हम अपने सपनों को परे करते हैं, तब हमें हिंदुस्थान की आवाज सुनाई देती है। तब तक हिंदुस्थान की आवाज हमें सुनाई नहीं देती। अब आप कहेंगे कि ये बात मैंने नो-कॉन्फिडेंस मोशन में क्यों रखी… इसका क्या मतलब है कि भारत एक आवाज है, लोगों का दुख है, लोगों का कष्ट है, मुश्किलें है… क्योंकि भाइयों और बहनों… तो स्पीकर सर, भारत एक आवाज है, भारत इस देश के सब लोगों की आवाज है और अगर हम उस आवाज को सुनना चाहते हैं तो हमें अहंकार को, नफरत को मिटाना पड़ेगा।
भारत हमारी जनता की आवाज है
एक और उदाहरण, दूसरे कैंप में एक महिला मेरे सामने आती है… मैं उससे पूछता हूं- तुम्हारे साथ क्या हुआ? और जैसे ही मैंने उससे ये सवाल पूछा-तुम्हारे साथ क्या हुआ, वैसे ही एक सेकंड में वो कांपने लगी… उसने अपने दिमाग में वो दृश्य देखा और वो बेहोश हो गई। मेरे सामने कांपती हुई बेहोश हो गई। तो ये मैंने आपको सिर्फ दो उदाहरण दिए हैं।
स्पीकर सर, इन्होंने मणिपुर में हिंदुस्थान की हत्या की है, सिर्फ मणिपुर की नहीं… हिंदुस्थान की हत्या की है। इनकी राजनीति ने मणिपुर को नहीं, हिंदुस्थान को मणिपुर में मारा है… हिंदुस्थान का कत्ल किया है, हिंदुस्थान का मर्डर किया है मणिपुर में। जैसे मैंने संबोधन की शुरुआत में बोला… भारत एक आवाज है, भारत हमारी जनता की आवाज है, दिल की आवाज है… उस आवाज की हत्या आपने मणिपुर में की। इसका मतलब भारत माता की हत्या आपने मणिपुर में की… भारत माता को आपने… मणिपुर के लोगों को मारकर भारत की हत्या की है। आप देशद्रोही हो, आप देशभक्त नहीं हो, आप देशप्रेमी नहीं हो, आप देशद्रोही हो, आपने देश की हत्या मणिपुर में की।
मोदी जी हिंदुस्थान की नहीं, सिर्फ दो लोगों की आवाज सुनते हैं
हिंदुस्थान की सेना मणिपुर में एक दिन में शांति ला सकती है, हिंदुस्थान की सेना का आप प्रयोग नहीं कर रहे हैं, क्योंकि आप हिंदुस्थान को मणिपुर में मारना चाहते हो। तो अगर नरेंद्र मोदी जी हिंदुस्थान की आवाज नहीं सुनते हैं, अगर हिंदुस्थान के दिल की आवाज नहीं सुनते हैं तो किसकी आवाज सुनते हैं? दो लोगों की आवाज सुनते हैं… किसकी आवाज सुनते हैं और वो इसलिए सुनते हैं, तस्वीर दिखाते हुए कहा- देख लीजिए अडानी जी के लिए मोदी जी ने क्या काम किया है… देख लीजिए ये पहले, ये बाद में… रावण दो लोगों की सुनता था-मेघनाथ और कुंभकरण, वैसे ही नरेंद्र मोदी दो लोगों की सुनते हैं-अमित शाह और अडानी।

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