मुख्यपृष्ठनए समाचारअब एआई करेगी कैंसर का पर्दाफाश

अब एआई करेगी कैंसर का पर्दाफाश

टाटा अस्पताल की पाठशाला में कैंसर को पहचानना सीख रही है एआई
‘बायो इमेजिंग बैंक’ में ६० हजार से अधिक कैंसर रोगियों का डेटा शामिल

रेडिएशन के मामले में ४० प्रतिशत की कमी

डॉ. कुलकर्णी का कहना है कि इस अभिनव परियोजना के तहत रेडिएशन के मामले में ४० प्रतिशत की कमी देखी गई है। एआई तुरंत निदान प्रदान करता है, जो डॉक्टरों के क्रॉस-चेक के बाद ९८ प्रतिशत सही साबित होता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) धीरे-धीरे हमारे जीवन के हर क्षेत्र में बड़े बदलाव ला रहा है। आंखों से लेकर पेट की बीमारी तक का पता लगाने में एआई का इस्तेमाल किया जा रहा है। ब्रिटेन के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर रिसर्च (एनआईएचआर) का दावा है कि एआई की मदद से बीमारियों की स्क्रीनिंग और इलाज दोनों का पता आसानी से लगाया जा सकता है। चूंकि भारत में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और कैंसर विशेषज्ञों की कमी के चलते मृत्यु दर को रोक पाना बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में देश के सबसे बड़े कैंसर अस्पताल ‘टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल’ ने भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की ओर रुख किया है।
टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल ने कैंसर रोगियों के तेजी से निदान के लिए ‘बायो इमेजिंग बैंक’ की स्थापना की है, जिसमें अब तक विभिन्न प्रकार के कैंसर से पीड़ित ६० हजार से अधिक कैंसर मरीजों का डेटा शामिल किया गया है। इस परियोजना में विशेष रूप से रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी से जुड़े स्कैन (डिजिटल तस्वीरों) को शामिल किया गया है। हालांकि, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल ने २०२३ में बांबे आईआईटी के साथ मिलकर बायो इमेजिंग बैंक की शुरुआत की था, जिसमें अब दिल्ली के एम्स और राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर और चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च की ओर से भी आर्थिक सहयोग मिल रहा है।

शुरुआत में सिर, गर्दन और फेफड़ों के कैंसर पर ध्यान केंद्रित किया गया और इनमें से प्रत्येक कैंसर के लगभग १००० रोगियों का डेटाबेस तैयार कर एआई एल्गोरिदम की परख और प्रशिक्षण का काम किया गया। चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक कई काम, जैसे कि लिंफ नोड मेटास्टेसिस की स्क्रीनिंग, न्यूक्लियस सेगमेंटेशन ऐंड क्लासीफिकेशन, बायोमार्कर प्रीडिक्शन (उदाहरण के लिए, ऑरोफरीन्जियल में एचपीवी और फेफड़ों के कैंसर में ईजीएफआर का अनुमान) के अलावा मरीज पर हो रहे उपचार के असर का अनुमान लगाया गया।

एक दशक में कैंसर के मामले दोगुने होने की संभावना

टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. सुदीप गुप्ता का कहना है कि अगले एक दशक में कैंसर के मामले सालाना १३ से बढ़कर २६ लाख होने का अनुमान है। ऐसे में वैंâसर की जांच में एआई का प्रयोग न केवल समय बचाएगा बल्कि जल्द इलाज शुरू करने में भी मदद करेगा। एआई तकनीक किसी मेडिकल स्कैन से सूक्ष्म से सूक्ष्म जानकारियां जुटा सकता है, जो मानव नजर में आसानी से पकड़ में नहीं आती हैं। ‘थोरैसिक सूट’ एआई एल्गोरिदम मान्य
उन्होंने कहा कि वर्तमान में हम ‘थोरैसिक सूट’ जैसे विविध कृत्रिम बुद्धिमत्ता एल्गोरिदम को मान्य कर रहे हैं। यह विशेष उपकरण छाती के डिजिटल एक्स-रे का निरीक्षण कर उसकी व्याख्या करता है, नोड्यूल्स और न्यूमोथोरैक्स जैसी गड़बड़ियों की पहचान करता है। जब आईसीयू में किसी मरीज का एमआरआई किया जाता है, तो एआई एल्गोरिदम स्वचालित रूप से निदान प्रदान करता है, जिसे रेडियोलॉजिस्ट मान्य करते हैं। इसे अक्सर सटीक पाया गया है। भविष्य में, एआई कैंसर के इलाज में परिवर्तनकारी भूमिका निभाने के लिए तैयार है, खासकर ग्रामीण भारत में मृत्यु दर को कम करने में।

अनावश्यक कीमोथेरेपी से बचा जा सकेगा

टाटा कैंसर अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. सुयश कुलकर्णी का कहना है कि एआई इस आधार पर काम करता है कि मानव मस्तिष्क किस तरह विभिन्न स्रोतों से सूचना इकट्ठा करता है। इसे ध्यान में रखकर कैंसर विशेषज्ञों के साथ मिलकर ऐसे एल्गोरिदम तैयार किए जा रहे हैं कि रेडियोलॉजिकल और पैथोलॉजिककल तस्वीरों का विश्लेषण कर एआई एक क्लिक पर यह निदान कर सके कि किसी को किस प्रकार का कैंसर हुआ है, या कोई ट्युमर किस हद तक पहुंच गया है, उसकी बनावट, उसकी कठोरता और लोच का पलभर में आकलन किया जा सकेगा। इससे अनावश्यक कीमोथेरेपी से बचा जा सकेगा और सीटी स्कैन से गुजरनेवाले रोगियों के लिए रेडिएशन के जोखिम को भी कम किया जा सकेगा।

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