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पाकिस्तान के बलूचिस्तान पर अब चीन की नजर: बंकर की आड़ में कब्जा करने की तैयारी!

सामना संवाददाता / नई दिल्‍ली
चीन हमेशा से अपने पड़ोसी मुल्कों के लिए एक खतरा साबित हुआ है। फिर चाहे वो तिब्बत हो या फिर ताइवान हर जगह चीन अपना कब्जा चाहता है। लेकिन अब चीन की नजर दूसरे देशों पर भी है, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है। चीन पाकिस्तान पर दबदबा बनाने की कोशिश में जुटा है। बताया जा रहा है कि चीन की नजर अब बलूचिस्तान पर भी है। खबर के अनुसार चीन एक तरफ तो मिलिट्री ऑपरेशंस के जरिए ताइवान को हड़पने की तैयारी में जुटा है तो दूसरे देशों को कर्ज तले दबाकर अपना दबदबा बढ़ाने की फिराक में है। श्रीलंका को लोन और इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर डुबाने के बाद अब पाकिस्तान की बारी है। खबर है कि सीपैक प्रोजेक्ट फेल होने के बाद चीन अब पाकिस्तानी सेना के लिए सीक्रेट मिसाइल बेस बनाने में जुटा है।
बनाए जा रहे सीक्रेट मिसाइल बंकर
चीन की पीएलए सेना बलूचिस्तान में पाकिस्तान के लिए सीक्रेट मिसाइल बंकर बना रही है। पहाड़ों में गुफा बनाकर मिसाइल शेल्टर बनाने की तैयारी चल रही है। सिंध के नवाबशाह और बलूचिस्तान के खुजदर के करीब यह निर्माण हो रहा है। खुफिया रिपोट्र्स के मुताबिक चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशियेटिव (बीआरआई) के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है सीपैक यानी चाइना पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर शुरू तो बड़े जोर-शोर से हुआ था। लेकिन उसकी रफ्तार अब बहुत धीमी पड़ चुकी है। खबर तो ये भी है कि पाकिस्तान अब सीपैक अथॉरिटी को ही भंग करने की तैयारी में जुटा है। जानकारों की मानें तो पहाड़ों में इस तरह के बंकर बनाने से एक तो ‘नेचुरल डिफेंस ’ मिल जाता है यानी ऊपर से ये पहचानना मुश्किल होता है कि वहां कोई खुफिया मिसाइल बेस है और दूसरा अगर कोई हवाई हमला होता है तो माउंटेन केव में रखी गई मिसाइल और गोला-बारूद को नुकसान कम पहुंचता है। पहाड़ों में बंकर बनाने से दूसरे देशों के सैटेलाइटों से भी काफी हद तक छिपा जा सकता है। इस तरह ‘माउंटेन केव’ बंकर की एक और खासियत होती है कि ये बड़ी आसानी से बनाए भी जाते हैं और निर्माण कार्य के दौरान किसी को हवा तक नहीं लगती। एक बार टनलिंग शुरू हो जाए तो लंबी दूरी तक भी हर वक्त काम किया जा सकता है। बता दें कि पहाडों में टनलिंग करने में चीन को महारत हासिल है। चीन ने तिब्बत में अपने एयरक्राफ्ट को सुरक्षित रखने के लिए इसी तरह के माउंटेन हैंगर तैयार किए है। मिसाइल बेस पाकिस्तानी सेना के लिए इसलिए भी बेहद जरूरी हैं, क्योंकि आए दिन बलूचिस्तान में बलूच विद्रोही पाकिस्तानी सेना के कैंप पर हमले करते रहते हैं।

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