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अब यूपी में हथियाई जा रही हैं एमएलसी की सीटें! एटा-मथुरा, मैनपुरी व लखीमपुर सपा प्रत्याशियों के नामांकन हुए रद्द

 भाजपाई उम्मीदवारों का हुआ निर्विरोध चयन
 भाजपा की ओर से चुनाव लड़ रही है पुलिस
 पर्चा वापस लेने के लिए बनाया गया दबाव
मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ। केंद्र के साथ राज्य में भी सरकार होने का फायदा भारतीय जनता पार्टी शानदार तरीके से उठा रही है। पार्टी ने हाल ही में यूपी में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में शासन-प्रशासन का प्रयोग करते हुए बूथों पर अपने प्रत्याशियों को वोट डलवाकर जीत हासिल कर ली। उससे पहले जिला पंचायत सदस्य एवं ब्लॉक प्रमुख चुनाव में भी भाजपा ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर अपने उम्मीदवारों को जिताया। अब यूपी में भाजपा द्वारा एमएलसी की सीटें भी हथियाई जा रही हैं। बता दें कि एटा- मथुरा, लखीमपुर खीरी के सपा प्रत्याशियों का नामांकन तक रद्द करवा दिया, जिससे भाजपाई उम्मीदवारों का निर्विरोध चयन हो गया।
मिली जानकारी के अनुसार स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधानपरिषद के निर्वाचन में नामांकन पत्रों की जांच के दौरान समाजवादी पार्टी के तीन उम्मीदवारों का नामांकन निरस्त हो जाने के कारण भारतीय जनता पार्टी के दो उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जबकि लखीमपुर खीरी में सपा प्रत्याशी अनुराग पटेल और एक निर्दलीय का नामांकन रद्द होने के बाद भी एक निर्दलीय भाजपा प्रत्याशी अनूप गुप्ता के सामने मुसीrबत बन गया है।
बताया जा रहा है कि भाजपाई और प्रशासन उसको पर्चा वापस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि जांच प्रक्रिया के दौरान एटा के एक निर्दलीय के अलावा समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार उदयवीर सिंह और राकेश यादव के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि तीनों के नामांकन पत्र में कुछ खामियां थीं और निर्वाचन अधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल ने उन्हें खारिज कर दिया। आरोप है कि भाजपा की ओर से पुलिस चुनाव लड़ रही है।
२४ मार्च को होगी आधिकारिक घोषणा
समाजवादी पार्टी ने मथुरा-एटा-मैनपुरी स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्रों से उदयवीर सिंह और राकेश यादव को मैदान में उतारा था। उनके पर्चा रद्द होने से दोनों सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ हो जाएगा। भाजपा ने इन दोनों सीटों पर क्रमश: आशीष यादव और ओमप्रकाश सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जिनकी निर्विरोध जीत तय मानी जा रही है लेकिन इसकी आधिकारिक घोषणा २४ मार्च को प्रक्रिया पूरी होने के बाद की जाएगी।
९ अप्रैल को है मतदान
गौरतलब है कि आगामी ९ अप्रैल को होने वाले राज्य विधानपरिषद के स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से ३६ सीट के लिए भाजपा और समाजवादी पार्टी एक बार फिर आमने-सामने हैं। कांग्रेस और बसपा ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं, जिससे भाजपा-सपा के बीच सीधा मुकाबला है। विधानपरिषद की सीट के लिए ९ अप्रैल को मतदान होगा और मतगणना १२ अप्रैल को होगी।
जनमत को कुचला जा रहा है
इस बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक ट्वीट में वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में सपा उम्मीदवारों को पुलिस की मौजूदगी में एटा में कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश करने से रोका जा रहा है और पृष्ठभूमि में गालियां सुनाई दे रही हैं। यादव ने इसी ट्वीट में कहा कि भाजपा राज में लोकतंत्र की रक्षा की अपेक्षा करना…दिन में तारे ढूंढ़ना है। ये बाहुबल का घोर निंदनीय रूप है, तो पर्चा नहीं भरने दिया जाएगा या चुनाव को प्रभावित किया जाएगा या परिणामों को। हार का डर ही जनमत को कुचलना है।
कोर्ट जाएगी महिला प्रत्याशी
मेरठ-गाजियाबाद एमएलसी सीट से नामांकन करने वाली गाजियाबाद निवासी महिला पूनम पर्चा खारिज होने पर फूट-फूटकर रोर्इं। महिला ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनका पर्चा दलित होने के चलते खारिज किया है। वे इसकी लड़ाई सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ेंगी। मेरठ-गाजियाबाद स्थानीय निकाय के एमएलसी चुनाव के लिए सोमवार को १४ प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किए थे। चुनाव प्रक्रिया में मंगलवार को नामांकन पत्रों की जांच की गई और २४ मार्च को नाम वापस लिए जा सकते हैं। एमएलसी चुनाव में कल नामांकन जांच के बाद १४ में से ८ प्रत्याशियों के नामांकन खारिज होने की बात कही गई है।

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