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यूपी में अब आया एमएलसी चुनाव: अपनों और नवागतों को तवज्जो देने के बीच फंसी भाजपा

•३० सीटों पर नामांकन आज से, निकाय की ३६ सीटों पर होने हैं चुनाव

विक्रम सिंह / सुल्तानपुर। यूपी में विस चुनाव के बाद अब ३६ एमएलसी सीटों के लिए होनेवाले चुनाव की हलचल बढ़ गई है। मंगलवार से ३० सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो जाएगी। सत्तासीन दल के प्रभुत्ववाले इस चुनाव को लेकर फिलहाल भाजपा ज्यादा सक्रिय नजर आ रही है और प्रत्येक सीट के लिए ३-३ नाम पैनल ने मांग लिए हैं। हालांकि कुछ सीटों पर नतीजा अप्रत्याशित भी आने के आसार हैं।  रविवार की शाम यूपी भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह व प्रदेश महामंत्री सुनील बंसल ने इस चुनाव के मद्देनजर प्रभारियों व पदाधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की। उम्मीद है कि दो फेज में होने वाले चुनाव के लिए पार्टी पहले चरण के प्रत्याशियों का ऐलान १६ मार्च तक कर देगी। फिलहाल यूपी विस चुनाव में दो तिहाई बहुमत मिलने से उत्साहित भाजपा अब विधान परिषद में वही सफलता हासिल करने की खातिर उत्साहित दिख रही है लेकिन लड़ाई इतनी आसान नहीं है। स्वतंत्रदेव सिंह ने गुरुमंत्र देते हुए कार्यकर्ताओं से वोटर लिस्ट पर फोकस करने व क्षेत्रों में होली मिलन समारोह आयोजित करने को कहा है। वहीं सुनील बंसल ने प्रभारियों से स्थानीय स्तर पर राय-मशविरा कर हर सीट पर तीन नामों का पैनल २४ घंटे के भीतर भेजने के निर्देश दिए हैं।

‘अपने’ और ‘बाहरी’ के बीच तय होंगे प्रत्याशी-भाजपा
निकाय की 36 सीटों के चुनाव में भाजपा के समक्ष धर्मसंकट भी है। उसे अपने और बाहरी के मध्य प्रत्याशी चुनने की चुनौती है। दूसरे दलों से आने वाले सक्षम चेहरों को भी मौका देना है। चुनावों से पहले सपा के आधा दर्जन से अधिक मौजूदा एमएलसी नरेंद्र सिंह भाटी, सीपी चंद्र, रविशंकर सिंह पप्पू, रमा निरंजन, सुल्तानपुर-अमेठी के कद्दावर शैलेंद्र प्रताप सिंह, रमेश मिश्र, शतरुद्र प्रकाश, घनश्याम लोधी और बसपा के सुरेश कश्यप आदि प्रमुख हैं। सूत्र बताते हैं इनमें से अधिकांश को पुनः भाजपा से रिपीट किया जाना लगभग तय है। साथ ही मिशन २०२४ के मद्देनजर सामाजिक समीकरणों के हिसाब से नए चेहरे भी सामने आएंगे। इनमें विधायकी का टिकट गंवा चुके या चुनाव हार चुके रेलवे के पूर्व अधिकारी देवमणि द्विवेदी (लंभुआ के निवर्तमान विधायक) आदि भी हो सकते हैं। द्विवेदी टिकट कटने के बावजूद चुनाव में तन-मन-धन से प्रचार में जुटने के कारण चर्चा में हैं। वहीं सपा से भी एमएलसी चुनाव लड़ने की ख्वाहिश रखने वालों की कमी नहीं है और पार्टी हाईकमान के सामने दावेदारों ने जोर-जुगाड़ और सिफारिश शुरू कर दी है।

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