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अब भीषण सूखे और गर्मी से निजात पाने के लिए अता की जा रही नमाज

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू

अनंतनाग का रहने वाला निदा फाजिली अपनी दुआ में खुदा से उस भीषण सूखे और गर्मी से निजाते पाने की दुआ को कबूल करने की फरियाद कर रहा है, जो कश्मीर में कई दशकों के बाद दिखा है। हालांकि, कश्मीरियों की यह बदकिस्मती ही कही जा सकती है कि कभी उन्हें कम बर्फबारी के दौर से गुजरना पड़ रहा है तो कभी भयानक बर्फबारी के दौर से निजात पाने को विशेष नमाज अता करनी पड़ रही है।
वर्ष 2018 के नवंबर महीने में समय से पूर्व होने वाली भयानक बर्फबारी के दौर में निदा फाजिली ने अपने खेतों और घरों को बचाने की खातिर विशेष नमाज में हिस्सा लिया था। अब सितंबर महीने में रिकार्ड तोड़ गर्मी और सूखे के कारण अब उनके भी कंठ सूखने लगे हैं। हालांकि, मौसम विभाग कहता है कि अगले चार दिनों के बाद कश्मीर को सूखे से निजात मिल सकती है। पर वह भी आशंकित है, क्योंकि कोई पश्चिमी विक्षोभ नजर नहीं आने के कारण इस बार मौसम की भविष्यवाणी सच साबित हो पाएगी इसके प्रति शंका का माहौल है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. इरफान रशीद कहते हैं कि यह सब क्लाइमेट चेंज का नतीजा है कि जिस कश्मीर की ओर सारी दुनिया गर्मी से छुटकारा पाने को दौड़ पड़ती थी, अब वे ही कश्मीरी बार-बार गर्मी से छुटकारा पाने को ठंडे स्थानों की ओर दौड़ लगाए हुए हैं। उनके बकौल, कश्मीर में पिछले कई सालों से मौसम की आंख मिचौली कश्मीरियों को परेशान किए हुए है। इसमें कभी भारी बर्फबारी, कभी सूखा और कभी बर्फ न गिरने की सजा भी उन्हें भुगतनी पड़ रही है।
वर्ष 2000 की शुरुआत में भी सालभर कश्मीर में बारिश नहीं हुई तो भयानक सूखे के दौर से गुजरने वाले कश्मीर के कई गांवों में फसलें तक नहीं बोई जा सकी थीं। केसर की फल पर भी मौसम की मार पड़ी थी। हालांकि, मौसम विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. मुखर अहमद कहते थे कि फिलहाल कश्मीर में बरसात की कमी के कारण भी ऐसे हालात पैदा हुए हैं, जो आने वाले दिनों में भी पानी के संकट को बढ़ाएंगे। अभी यह धान और सेब की फसल को चौपट कर रहे हैं। जानकारी के लिए इस बार पूरे प्रदेश में बहुत कम पानी बरसा है और सितंबर में भी ऐसी ही स्थिति के बने रहने की आशंका जताई जा रही है।

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