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अब अवैध मोबाइल टावरों को लेकर उठने लगे सवाल!

सामना संवाददाता / मुंबई

घाटकोपर होर्डिंग दुर्घटना के बाद बिल्डिंग की छतों पर मोबाइल टावरों और छतों पर बने लोहे के शेड से भविष्य में होने वाले खतरे को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मुंबई में तेज बारिश और भारी तूफान के बीच हजारों किलोग्राम वजनी टावर और शेड की वजह से बड़ा हादसा हो सकता है! जिसे देखते हुए मुंबईकरों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। पुराने आंकड़े देखें तो मुंबई में इमारतों पर लगे ७५ प्रतिशत से अधिक मोबाइल टावरों और लोहे के शेड अनधिकृत हैं। ऐसे में यह स्पष्ट है कि मुंबईकरों को घाटकोपर की घटना की तरह भविष्य में अनधिकृत टावर से भी खतरा है। आश्चर्य है कि मनपा के पास इस मामले में कोई नया डेटा नहीं है। लेकिन वर्ष २०१४ के डेटा बताता है कि मुंबई में लगे कुल ४,७७६ टावरों में से ११५८ अधिकृत और ३६२८ अवैध हैं। मनपा ने अपनी वेबसाइट पर भी यह डेटा जारी किया था। उसके अनुसार अधिकृत टावरों की संख्या २४.२५ फीसदी थी जबकि अनधिकृत टावरों की संख्या ७५.७५ फीसदी थी। तबसे अब तक १० वर्षों में टावरों की संख्या कई गुना से अधिक बढ़ने की संभावना विशेषज्ञों ने जताई है।
अवैध मोबाइल टावरों को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने वाले वकील अशोक जैसवार ने बताया कि यह पूरा मामला एक बड़ा घोटाला है। पूरा भ्रष्टाचार से जुड़ा है। बड़े पैमाने पर अवैध टावर लगाए गए हैं। खासकर झोपड़पट्टी इलाकों में लगे हैं। शिकायतकर्ता मनपा, म्हाडा और कलेक्टर इन तीनों के बीच उलझे रहते हैं। लेकिन कोई हल नहीं मिलता है। हाउसिंग सोसायटियों के लिए तो नियम हैं लेकिन झोपड़पट्टी में भी बड़े पैमाने पर टावर लगाए गए हैं, जहां कोई नियम नहीं है। यदि तेज तूफान और बारिश हुई तो ये टॉवर गिर सकते हैं। ऐसे में कौन जिम्मेदार होगा इसका कोई सुनिश्चित प्रावधान नहीं है। अशोक जैसवार ने कहा कि मुंबई में सभी मोबाइल टावरों एवं इमारतों पर लगे लोहे के शेड की जांच कर ऑडिट रिपोर्ट जारी की जानी चाहिए।

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