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अब खोस्ता-२ का खतरा… कोशिकाओं को कर सकता है खल्लास! चमगादड़ में मिला नया वायरस

  • कोविड टीका भी नहीं होगा प्रभावी

एजेंसी / वॉशिंगटन
चीन से शुरू हुए कोरोना वायरस ने पूरे विश्व में तबाही मचाया। इस वायरस की वजह से लाखों लोगों की जान चली गई, अनेक अनगिनत लोग बेरोजगार हो गए। इस वायरस के आने के बाद अन्य कई वायरस आए और लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हुआ। एक वायरस तो इंसान को छोड़ जानवरों को भी प्रभावित किया। हालांकि इन सबसे ज्यादा खतरनाक कोरोना वायरस रहा। वैसे कोरोना से दुनिया लगभग उबर चुकी है। इसी बीच अमेरिकी वैज्ञानिकों ने चमगादड़ों में सार्स सीओवी-२ जैसा एक नया वायरस पाया है। वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि यह खोस्ता-२ वायरस मानव कोशिकाओं को प्रभावित करेगा यानी खल्लास कर देगा। कुछ विशेषज्ञों का यह भी दावा है कि यह वायरस न सिर्फ मनुष्यों को संक्रमित कर सकता है, बल्कि वर्तमान में उपलब्ध कोविड टीके का भी इस पर असर नहीं पड़ेगा।
वॉशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के पॉल एलन स्कूल फॉर ग्लोबल हेल्थ के शोधकर्ताओं द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि खोस्ता -२ मानव कोशिकाओं में प्रवेश कर सकता है। हालांकि यह वायरस सबसे पहले २०२० में रूस में पाया गया था लेकिन वैज्ञानिकों ने तब यह नहीं सोचा था कि यह संक्रमण इंसानों के लिए कोई खतरा पैदा कर सकता है। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि सार्स कोव-२ के ओमायक्रॉन वैरिएंट की तरह इस वायरस में ऐसे जीन नहीं हैं, जो लोगों में गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं। नया वायरस मानव कोशिकाओं को आसानी से प्रभावित कर सकता है। शोधकर्ता माइकल लेटको का कहना है कि कोविड-१९ के खिलाफ टीका लगाए गए लोग वायरस के असर से अछूते नहीं रह सकते और न ही वे लोग जो ओमायक्रॉन संक्रमण से उबर चुके हैं।
वन्यजीवों के जरिए फैलता है
खोस्ता -२ वन्यजीवों जैसे चमगादड़, पैंगोलिन, रैकून कुत्तों के जरिए फैलता है। लेटको ने मीडिया को बताया कि इस स्तर पर यह कहना मुश्किल है कि क्या खोस्ता-२ में महामारी या यहां तक ​​कि महामारी फैलाने की क्षमता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर खोस्ता-२ सार्स-सीओवी-२ के साथ जुड़ जाता है तो इसके और भी संक्रामकता बढ़ सकती है।
टोमैटो फ्लू ने बच्चों को किया परेशान
भारत में टोमैटो फ्लू भी चर्चा में रहा। लोग हैरान हो गए कि अभी तक कोरोना से जान नहीं छूटी है और यह नई बीमारी कहां से आ गई? केरल में इस फ्लू से कई संक्रमण आने के बाद हड़कंप मचा। दरअसल फूड एंड माउथ से संबंधित इस इंफेक्शन को टोमैटो फीवर और टोमैटो फ्लू कहा गया। भारत में इस बीमारी के ८२ मामले दर्ज किए ग्ए। यह मामले छह मई को केरल के कोल्लम जिले में मिले थे। लैंसेंट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन सभी बच्चों की उम्र पांच साल से कम है। रिपोर्ट में बताया गया कि इस बीमारी में त्वचा पर लाल निशान पड़ने लगते हैं और बड़े-बड़े दाने भी दिखाई देते हैं। कहा जा रहा है कि इसी तरह के लक्षण कोरोना, चिकनगुनिया, डेंगू और मंकीपॉक्स संक्रमण में भी दिखाई देते हैं। शायद लाल फफोले पड़ने की वजह से ही इसका नाम टोमैटो फ्लू रखा गया। अन्य लक्षणों की बात करें तो इनमें स्किन पर चकत्ते, तेज बुखार, शरीर में ऐंठन, जोड़ों में सूजन, डिहाइड्रेशन और थकान भी शामिल हैं।
लंपी से हजारों मवेशियों की मौत
देश के कई राज्‍यों में गायों और भैंसों में लंपी स्किन रोग वायरस का संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। इसकी वजह से गुजरात, राजस्‍थान सहि‍त कई राज्‍यों में हजारों की संख्‍या में मवेशियों की मौत हो चुकी है। मरने वाले पशुओं में सबसे बड़ी संख्‍या गायों की है। इस रोग का कोई ठोस इलाज न होने के चलते सिर्फ वैक्‍सीन के द्वारा ही इस रोग पर नियंत्रण और रोकथाम की जा सकती है। हालांकि पशु चिकित्‍सा विशेषज्ञों की मानें तो कुछ देसी और आयुर्वेदिक उपायों के माध्‍यम से भी लंपी रोग से संक्रमित हुई गायों और भैंसों को ठीक किया जा सकता है। अभी तक देश के करीब १७ राज्‍यों में फैल चुकी यह बीमारी महामारी का रूप ले चुकी है।
मंकीपॉक्स ने भी किया परेशान
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ११ देशों में मंकीपॉक्स वायरस के ८० मामलों की पुष्टि हुई, इसने भी लोगों को परेशान किया। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि इस असामान्य वायरस के मामले आमतौर पर पश्चिम और मध्य अफ्रीका के कुछ हिस्सों में जानवरों में पाए जाते थे। इसके मामले कभी-कभार स्थानीय लोगों या फिर पर्यटकों में पाए जाते हैं। चिंता की बात ये रही कि मंकीपॉक्स के मामले प्रमुख यूरोपीय देशों और कनाडा, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में भी मिले। ब्रिटेन के स्वास्थ्य सचिव साजिद जाविद ने कहा था कि अधिकतर मामले हल्के रहे और चेचक की वैक्सीन इस बीमारी से सुरक्षा प्रदान करती है। ब्रिटेन की हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी ने भी कहा है कि अधिकतर मामले गे और बाइसेक्सुअल पुरुषों में मिले हैं। फ्रांस में पहला मामला २९ साल के शख्स में मिला, जो इले डी फ्रांस का रहने वाला था।

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