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कोरोना के साथ अब गर्मी का कहर! वाराणसी में लगी लाशों की कतार

  •  मणिकर्णिका घाट पर २४ घंटे जल रहे हैं शव
  •  चार घंटे इंतजार के बाद आ रही है बारी

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान यूपी में संक्रमितों की मौत का आंकडा योगी सरकार ने भले ही छिपा लिया था लेकिन शमशान घाटों में लगातार जलती चिताओं और गंगा में बहते शवों के कारण सच्चाई सामने आ गई थी। जिनकी तस्वीरें देखकर पूरी दुनिया दांतों तले उंगली दबाने को विवश हो गई थी। अब यूपी में प्रचंड गर्मी पड़ रही है तो वहीं देश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना मरीजों की संख्या के साथ चौथी लहर के आने की आसंका लोगों को डराने लगी है। इसी बीच वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट पर एक बार फिर शवों की लंबी कतार लगने से लोगों में हड़कंप  मच गया है। वाराणसी में अचानक बढ़ी मौतें कोरोना के कारण हो रही हैं या फिर गर्मी से? ये सवाल लोग पूछ रहे हैं।
फिलहाल मणिकर्णिका घाट पर रोज करीब ५० लाशें आ रही हैं। चिताओं के २४ घंटे जलने के बाद भी लोग अपने परिजनों के शवों के दाह-संस्कार के लिए लगभग ४ घंटे इंतजार करने को मजबूर हो रहे हैं।
बता दें कि उत्तर प्रदेश के बनारस स्थित मणिकर्णिका घाट इन दिनों शवों से पटा पड़ा है। बताया जा रहा है कि सामान्य दिनों की तुलना में १०-२० शव अधिक लाए जा रहे हैं। पहले घाट पर दाह-संस्कार के लिए ३०-३५ शव लाए जाते थे लेकिन अब प्रतिदिन ४०-५० शव लाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन-रात चिताओं के जलने के बाद भी शव घंटों तक घाट पर पड़े नजर आ रहे हैं। इसकी वजह ये भी बताई जा रही है कि मोक्ष की भावना से बड़ी संख्या में लोग दूसरे जिलों से भी शव दाह-संस्कार के लिए मणिकर्णिका घाट पर लाते हैं फिर भी संख्या सामान्य दिनों से अधिक है। उस पर कुप्रबंधन का सामना यहां शव के साथ आने वाले परिजनों को भुगतना पड़ रहा है।
जलस्तर घटने से भी बढ़ा इंतजार
शवों के दाह-संस्कार में लगनेवाली देरी की एक वजह गंगा का जलस्तर कम होना भी बताया जा रहा है। भीषण गर्मी के कारण गंगा का जलस्तर कम हो गया है। पानी और घाटों के बीच की दूरी बढ़ गई है इसलिए चिता को बुझाने में ज्यादा समय लगता है। इससे नए शवों के दाह संस्कार में अधिक समय लग रहा है।

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