मुख्यपृष्ठटॉप समाचारअब योजनाओं की लूट! दुर्घटना बीमा योजना से शिवसेनाप्रमुख का नाम हटाया

अब योजनाओं की लूट! दुर्घटना बीमा योजना से शिवसेनाप्रमुख का नाम हटाया

सामना संवाददाता / मुंबई
देश को आजादी दिलाने से लेकर देश के विकास तक में कई महापुरुषों ने अपना जीवन गवां दिया है। उन्हें प्रेरणा मानकर देश के युवा काम करते हैं, उन महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए कई योजनाएं पूर्ववर्ती सरकारों ने दिवंगत महापुरुषों के नाम पर शुरू की थी लेकिन केंद्र की मोदी सरकार दिवंगत महापुरुषों के योगदान को छिपाने और पूरा श्रेय खुद लेने की मंशा से काम कर रही है। दिवंगत महापुरुषों से द्वेष के कारण मोदी सरकार उनके नाम पर चल रही योजनाओं को या तो बंद कर रही है या फिर नई पैकिंग में पुराना माल की तर्ज पर नए नाम से शुरू करके बेवजह श्रेय लूटने का प्रयास कर रही है।
भाजपा नेतृत्ववाली केंद्र व राज्य की मौजूदा सरकार महापुरुषों के नाम के प्रति ‘एलर्जी’ दर्शा रही है। ताजा मामला है महाराष्ट्र का, जहां बालासाहेब ठाकरे के नाम पर बनी सड़क दुर्घटना बीमा योजना को सरकार ने पहले तो जोर-शोर से लाने की घोषणा की, लेकिन बाद में धीरे से उनके नाम को इस योजना से अलग कर इसे दूसरी स्वास्थ्य योजना में विलय कर दिया। आश्चर्य है कि बालासाहेब के नाम पर सत्ता में आनेवाले और शिवसेना से गद्दारी करनेवालों ने यह काम किया है। यही नहीं, केंद्र सरकार में भी यही हाल है। जवाहर लाल नेहरू हो या अटल बिहारी वाजपेयी या फिर शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे हों, ऐसे तमाम नेताओं के नाम पर शुरू योजनाओं को केंद्र व राज्य की सरकार दबाने या फिर उनके नाम को उस परियोजना से हटाने का काम कर रही है। शहरी उत्थान के लिए जेएनएनयूआरएम को बंद कर अटल अमृत योजना शुरू की गई थी, उसे भी बंद कर अब केंद्र की मोदी सरकार ‘पीएम’ नाम से योजनाएं शुरू करने पर जोर दे रही है, ताकि पीएम के रूप में मोदी जी उसका श्रेय ले सकें। बुधवार को शहरों में प्रदूषण रोकने के लिए इलेक्ट्रिक बसें पीएम ई- बसेस के नाम से शुरू करने की घोषणा की गई है, जबकि वर्ष २००५ में कांग्रेस नेतृत्व वाली मनमोहन सिंह सरकार ने यही योजना शुरू की थी। इतना ही नहीं, दिल्ली में नेहरू मेमोरियल म्यूजियम का नाम बदलकर अब पीएम मेमोरियल म्यूजियम कर दिया गया है।

नेहरू संग्रहालय का भी बदला गया नाम
नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी का नाम अब आधिकारिक रूप से बदलकर पीएम म्यूजियम एंड लाइब्रेरी कर दिया गया है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नाम परिवर्तन पर मुहर लग गई। पीएम म्यूजियम एंड लाइब्रेरी की कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष ए. सूर्य प्रकाश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस संदर्भ में जानकारी दी। इसका नाम जून माह में ही बदलने की कवायद शुरू हो चुकी थी। इसका नाम बदल जाने से कांग्रेसियों में कड़ी नाराजगी देखी जा रही है।

शिवसेना में आक्रोश की लहर
राज्य सरकार ने सड़क दुर्घटना बीमा योजना का विलय महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना में कर दिया है, वहीं दुर्घटना बीमा योजना से शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे का नाम हटा दिया गया है। हाल ही में जारी योजना के विज्ञापन में दुर्घटना बीमा योजना का उल्लेख होने के बावजूद बालासाहेब का नाम ‘गायब’ होने से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में गुस्से की लहर देखने को मिल रही है। उल्लेखनीय है कि २०२० में तत्कालीन महाविकास आघाड़ी सरकार ने ‘बालासाहेब ठाकरे सड़क दुर्घटना बीमा योजना’ की घोषणा की थी। इस योजना के तहत अध्यादेश के माध्यम से घायलों को ३०,००० रुपए तक विभिन्न ७४ उपचार मुफ्त प्रदान किए जाने थे। कुछ वजह से पिछले तीन वर्षों से यह योजना ठप्प पड़ी है। राज्य में सत्ता पलट के बाद आई शिंदे-फडणवीस सरकार ने बालासाहेब ठाकरे सड़क दुर्घटना बीमा योजना को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की घोषणा की थी। लेकिन २८ जुलाई को निकाले गए अध्यादेश में इस योजना को स्वतंत्र रूप से लागू न करके ‘महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना’ अंतर्गत ही लागू किया जाएगा, ऐसा राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है।
इस पर शिवसेना द्वारा नाराजगी भरी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की जा रही हैं। महायुति सरकार का शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के प्रति अलग ही प्रेम है, ऐसी आलोचना शिवसेना प्रवक्ता व सांसद अरविंद सावंत ने की है। हालांकि, इस मामले में छीछालेदर होने के बाद सरकार ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे के नाम पर एक अलग विज्ञापन निकाला जाएगा।
कोट-
शिवसेना प्रवक्ता व सांसद अरविंद सावंत ने बताया कि मूल रूप से शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के नाम से मौजूदा योजना के स्वतंत्र अस्तित्व को बरकरार न रखते हुए दूसरी योजना में शामिल कर दिया गया। ऐसा करते हुए बालासाहेब ठाकरे का नाम निकाल देना यह बेहद गलत है, इसका जवाब जनता देगी।
जेएनएनयूआरएम, अटल अमृत योजना के बाद अब पीएम ई-बस
देश के छोटे-बड़े शहरों के विकास के लिए २००५ में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगवाई में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी विकास मिशन की शुरुआत की गई थी। इसके तहत देश के सभी छोटे शहरों को यातायात, स्वच्छता आदि मूलभूत संसाधनों के साथ विकसित करने की योजना थी। २०१२ में इस योजना को २ साल के लिए बढ़ाया गया। लेकिन २०१४ में देश में सत्ता पाfरवर्तन के बाद इस योजना को बंद कर दिया गया और इसकी जगह मोदी सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर अटल ‘अमृत’ योजना (अटल मिशन रिजुवेशन अर्बन एंड ट्रांसफॉरमेशन योजना) शुरू की थी। लेकिन यह योजना धीरे-धीरे वैâसे गायब हो गई, लोगों को भी पता नहीं चला। इस सरकार ने पुरानी योजनाओं को धीरे-धीरे बंद कर दिया। हाल ही में मोदी सरकार ने पीएम ई-बस के नाम से नई योजना शुरू की है। इसके तहत देश के १६९ शहरों में से १०० शहरों का चयन कर १० हजार इलेक्ट्रिक बसें शुरू की जाएंगी। इसके लिए ५७,६१३ करोड़ रुपए खर्च होंगे, जिसमें से २० हजार करोड़ रुपए केंद्र सरकार देगी, बाकी का हिस्सा राज्य सरकार को देना होगा।

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