मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाहम खग को आजादी दे दो।

हम खग को आजादी दे दो।

गुलाम क्यों रखते हो हमको
आजादी मटियामेल किए हो,
हम पंक्षी जीवन से तुम
कितना घटिया खेल किए हो।
जब जन्म मिला है उड़नेवाला
तो पंख खोलकर उड़ने दो
कुछ नई कहानी नए स्वर
और नए ताल में बुनने दो।
ठाकुर हमें आजादी दे दो।
हम समय-समय पर आ जाएंगे
दाने आकर खा जाएंगे
खुशियां बदले में दे देंगे,
एक नहीं हम सौ आएंगे
सौ-सौ खुशियां दे जाएंगे
वातावरण चहक जाएगा
विजय पताका लहराएगा
तू सच्चा मानव कहलाएगा
बस हमको आजादी दे दो।
गीत गवाते हो बंधन में
पर मन कुंठा से भरा-भरा
आक्रोशित चलता है जीवन
सम्मान नहीं है खरा-खरा।
देखो सज्जन छींट रहे जो
दाने स्वतंत्र परिंदों को
वर्ण-वर्ण के जुटे परिंदे
रंग-बिरंगे धर्मों के,
अगर छींट सको दाने ऐसे तो
सैलाब यहां आ जाएगा
ठाकुर हमें आजादी दे दो
राज तेरा जम जाएगा।
-रत्नेश कुमार पांडेय

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