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हे भगवान! बचा लो ४१ जान

कविता श्रीवास्तव
हमने वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप का चरमोत्कर्ष देखा। मिठाईयां, गिफ्ट्स और पटाखे की रोशनी से चकाचौंध दीपावली का पर्व मनाया। लोग पर्यटन और टूर पर भी निकल पड़े हैं, लेकिन ऐन दीपावली से पहले उत्तराखंड में उत्तरकाशी स्थित सिल्क्यारा के निर्माणाधीन सुरंग में फंसे ४१ मजदूर न दीपावली देख पाए, न क्रिकेट वर्ल्ड कप मैच। वे तो पिछले आठ दिनों से धूप और रोशनी भी नहीं देख पाए हैं। मिठाइयां छोड़िए, उन्हें तो भोजन तक नसीब नहीं हुआ है। बीते आठ दिनों से वे पाइप के जरिए भेजे जा रहे पॉपकॉर्न और ड्राइप्रâूट के सहारे ही जी रहे हैं। उन्हें पाइप से ही ऑक्सीजन और दवाइयां भी भेजी जा रही हैं। वे अपनी जान बचने, न बचने की आशंकाओं के बीच अटके हुए हैं। राज्य व केंद्र सरकार से लेकर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, रेलवे व अन्य के तकनीकी एक्सपर्ट्स के अलावा विदेशी विशेषज्ञ भी घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव कार्य में डटे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी भी पहुंचे हैं। देश-विदेश में उपलब्ध तमाम मशीनें एयरलिफ्ट करके वहां लाई गई हैं। टनल में बड़ी पाइप घुसा कर उसके जरिए मजदूरों को निकालने का प्रयास असफल हुआ है। अब पहाड़ के ऊपर से ड्रिलिंग का प्रयास जारी है। डॉक्टरों की टीम मजदूरों के संपर्क में है। भीतर डर, तनाव, कब्ज, ब्लडप्रेशर, डिप्रेशन हर तरह की समस्याओं से वे जूझ रहे होंगे। शारीरिक शिथिलता भी आ गई होगी। आज के इस आधुनिक युग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जमाने में भी इन मानवीय जीवों को बचाना हम सबके लिए बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। उन्हें सकुशल बाहर निकालने की जद्दोजहद जारी है। क्रिकेट की एक गेंद को बाउंड्री लाइन के बाहर जाने की उम्मीद को लेकर पूरा स्टेडियम ही नहीं बल्कि पूरा देश जिस तरह एक साथ उछल पड़ता है, काश पूरा देश इन ४१ जिंदगानियों के लिए भी दुआएं करता। आखिर वे किसके लिए काम कर रहे थे? देश के प्रधानमंत्री के प्रोजेक्ट के तहत चारधाम यात्रा जाने वाले श्रद्धालुओं को सहूलियत हो, इसी उद्देश्य से उत्तरकाशी में टनल का निर्माण किया जा रहा है। हालांकि भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार, उत्तराखंड के पहाड़ों पर टनल का काम अब तक विफल ही रहा है, क्योंकि वहां की पहाड़ियां रेतीली हैं। चट्टानों वाली नहीं हैं। इसीलिए उत्तराखंड में हर साल भूस्खलन और पहाड़ के धंसने की घटनाएं होती हैं। इसके बावजूद टनल बनाया जा रहा था। निश्चित रूप से इसमें कुछ न कुछ तकनीकी खामियां थीं। बाबा केदारनाथ, बाबा बद्रीनाथ और सभी देवी-देवताओं से यही प्रार्थना है कि किसी तरह उन सबको बचा लें। इनमें झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के भी मजदूर हैं। ये सभी हमारे देश के श्रमिक हैं, कामगार हैं, हमारी ताकत हैं। उम्मीद करते हैं कि बहुत जल्दी ये सब सकुशल लौट आएंगे।

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