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एक तरफ भाजपा की शोबाजी राजनीति, दूसरी तरफ बदहाली में जी रहे हैं अयोध्यावासी!

 प्रति महीने ५ हजार से भी कम है कमाई
आधी महिलाओं में है खून की कमी
सामना संवाददाता / मुंबई
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर अयोध्या इन दिनों सुर्खियों में है। सीएम योगी और भाजपा इस अवसर को जोर शोर से भुनाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रही है। सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ कई बार अयोध्या का दौरा कर चुके हैं। वहां दीपोत्सव के रिकॉर्ड बनते-टूटते रहे हैं। पर यदि नहीं कुछ बदला तो वह है अयोध्यावासियों की किस्मत। एक रिपोर्ट के अनुसार, अयोध्या के लोग काफी बदहाली में जी रहे हैं। उनकी महीने की कमाई पांच हजार रुपए से भी कम है। शायद यही वजह है कि वहां की आधी महिलाएं खुन की कमी से जूझ रही हैं और उन्हें एनिमिया है।
भाजपा की शोबाजी राजनीति की मार अयोध्यावासी झेल रहे हैं। भाजपा ने हमेशा लाइमलाइट में रहने के लिए मंदिर का मुद्दा उठाया, पर अयोध्या वासियों का जीवन वैâसे बेहतर बने इस पर ध्यान नहीं दिया। बीते ३० दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में १५,७०० करोड़ रुपए से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था। मोदी ने अयोध्या नगरी के विकास के महत्व को समझाते हुए कहा था, ‘अवध क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे यूपी के विकास को ये हमारी अयोध्या दिशा देने वाली है।’ इन दावों का सच तो बाद में पता चलेगा, लेकि‍न अभी जो आंकड़े हैं, वो बताते हैं कि अयोध्या के लोगों की आय यूपी की औसत प्रति व्यक्ति आय से कम है, जिले की आधी महिलाएं एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित हैं, प्रति व्यक्ति बिजली खपत राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है। अंग्रेजी दैनिक ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय के डेटा के आधार पर अयोध्या का विश्लेषण किया है। इसके अनुसार, कमाई के मामले में पिछड़ा जिला है अयोध्या। अयोध्यावासियों की कमाई राष्ट्रीय औसत से तो कम है ही, उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों के लोग भी इनसे ज्यादा कमाते हैं।

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