मुख्यपृष्ठनए समाचारकाशी में अनूठा बैंक! ....रामनवमी पर भक्तों को दिया जाता है राम...

काशी में अनूठा बैंक! ….रामनवमी पर भक्तों को दिया जाता है राम नाम का ऋण

उमेश गुप्ता / वाराणसी। १० अप्रैल को राम नवमी पर त्रिपुरा भैरवी स्थित राम रमा पति बैंक में पूर्व के वर्षों की भांति इस वर्ष भी भगवान श्री राम का जन्मोत्सव मनाया जाएगा और भक्तों में राम नाम का ऋण वितरित किया जाएगा। इसके लिए इस मंदिर और बैंक में तैयारी शुरू हो चुकी है।

काशी में शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के नौ विग्रह हैं, जिनका शारदीय नवरात्र में दर्शन होता है, तो नौ गौरियों का विग्रह भी है, जिनका दर्शन वासंतिक नवरात्र में किया जाता है। नौ दिनों तक शक्ति की आराधना में लीन काशीवासी नवमी के दिन राम नवमी मनाते हैं। ठीक उसी तरह जैसे शारदीय नवरात्र के बाद दशहरा मनाया जाता है। राम नवमी को राम जन्म का उत्सव भी पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन श्री काशी विश्वनाथ गली में स्थित राम रमापति बैंक में राम भक्तों की कतार लगती है। इस मंदिर में जहां प्रभु राम के बाल स्वरूप प्रतिमा का दर्शन होता है, वहीं बैंक में राम नाम के ऋण के लिए पर्ची जमाकर उन्हें राम नाम का ऋण दिया जाता है। इसके साथ ही अरबों राम नाम की सजी झांकी का परिक्रमा होगा।

बताया जाता है कि तकरीबन ९६ साल पहले १९२६ में राम नाम का खाता खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। लेकिन यहां हर किसी के लिखे राम नाम को जमा नहीं किया जाता। इसके लिए बाकायदा खाता खुलता है। खाता खोलने के लिए ठीक बैंक खाते के समान ही बैंक का फॉर्म भरा जाता है। इस फॉर्म पर अपना नाम-पता दर्ज कराने के साथ ही मनोरथ भी लिखना होता है। यह सब रिकॉर्ड बैंक की नियमावली की तरह गोपनीय होता है।

यहां खाता खुलवाना आसान नहीं है। इसके लिए बैंक की अपनी नियमावली है। इसके तहत खाता धारक के आचार-विचार, मन, वचन और कर्म के साथ आहार-व्यवहार पर भी ध्यान दिया जाता है। इन सभी बंदिशों को पूरा करने की शपथ लेने वाला ही यहां खाता खोल सकता है। खाता खोलने के बाद बैंक से बाकायदा राम नाम लिखने का कागज मिलता है। उस कागज पर राम नाम लिखना होता है। राम रमापति बैंक के सेवादार आशीष मेहरोत्रा बताते हैं कि राम नाम का कर्ज लेनेवालों के लिए कुछ नियम हैं, जिसके तहत उन्हें मदिरा, मांस, मछली, प्याज, लहसुन आदि का पूर्णतया परित्याग करना होता है।

ऐसा माना जाता है कि इस बैंक से कर्ज लेकर पूरा भरनेवाले भक्तों की मनोकामना जरूर पूर्ण होती है। भक्त यहां से सवा लाख राम नाम का कर्ज रामनवमी के मौके पर लेता है और आठ महीने दस दिन यानी २५० दिन राम नाम लिखकर इसी बैंक में जमा करना पड़ता है। इस क्रिया को लखौरी कहते हैं। इस तरह सवा लाख बार राम का नाम लिखना होता है, जिसके लिए राम बैंक की मुहर लगे कागज, लकड़ी की कलम और लाल स्याही बैंक की तरफ से मुफ्त में दी जाती है। इस अनोखे बैंक के बारे में बताया जाता है कि इस बैंक की जब शुरूआत की गई थी। तब इस बैंक में महज दो खातेदार थे। लेकिन आज यहां पूरे देश के एक लाख से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। लोगों का विश्वास है कि यहां से जुड़ने के बाद उनके साथ सब कुछ अच्छा ही होता है। यहां अब तक १९ अरब के करीब श्रीराम नाम का कर्ज जमा हो चुका है।

 

अन्य समाचार