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भारत की एक अरब जनता खाना जुटाने में असमर्थ!

एजेंसी / नई दिल्ली

संयुक्त राष्ट्र की २०२३ की रिपोर्ट से सामने आई सच्चाई

केंद्र सरकार ने हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में जनता को लुभाने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले पांच साल के लिए बढ़ा दिया था। इस योजना के तहत सरकार गरीबों का पेट भरने का दावा करती है और अपनी पीठ थपथपाती है। हालांकि, अक्टूबर में ग्लोबल हंगर इंडेक्स (वैश्विक भुखमरी सूचकांक) में भारत १२५ देशों में १११वें पायदान पर था। अब खबर आ रही है कि देश की एक अरब जनता अल्पपोषित है यानी उनको आवश्यक भोजन नहीं मिल पा रहा है। खाद्य सुरक्षा और पोषण पर संयुक्त राष्ट्र की २०२३ की रिपोर्ट में कहा गया है कि ७४.१ फीसदी भारतीय या भारत के एक अरब से अधिक लोग २०२१ में पौष्टिक आहार का इंतजाम करने में असमर्थ थे। रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र की पांच एजेंसियों की यह रिपोर्ट इस सप्ताह की शुरुआत में जारी की गई थी। रिपोर्ट में २०२०-२२ के दौरान भारत की कुपोषित आबादी का अनुपात १६.६ प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है।

यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) और अन्य एजेंसियों द्वारा तैयार की गई है। यह आंकड़ा एक सर्वेक्षण पर आधारित है, जिसमें आठ प्रश्न और ३,००० उत्तरदाताओं का सैंपल सर्वे शामिल था। हार्वर्ड विश्वविद्यालय में जनसंख्या स्वास्थ्य और भूगोल के प्रोफेसर, भारत में भोजन की कमी का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों में से एक एसवी सुब्रमण्यम के अनुसार, भारत में भूख और भोजन की कमी के अनुमान के बारे में केंद्र की वाजिब चिंताओं के आलोक में ८१.३ करोड़ लोगों को खाद्य सहायता की जरूरत का अनुमान भी आश्चर्यजनक है, क्योंकि यह अल्पपोषण की व्यवहारिक संख्या से अधिक है।

खाद्य सुरक्षा के लिए अभियान चलाने वाले एक गैर-सरकारी नेटवर्क, भोजन का अधिकार अभियान (आरएफसी) के सदस्यों ने कहा कि एफएओ का अनुमान है कि १.०४३ अरब लोग पौष्टिक आहार नहीं ले सकते, यह हमारे भी आकलन के अनुरूप है कि एक अरब से अधिक लोगों को खाद्य सहायता की आवश्यकता है। आरएफसी के राष्ट्रीय समन्वयक राज शेखर के अनुसार, ८१.३ करोड़ का अनुमान २०११ की जनगणना पर आधारित है और अगली जनगणना दो साल से लंबित है। उन्होंने कहा कि नई जनगणना के बिना कई जरूरतमंद, कमजोर लोगों के पास राशन कार्ड नहीं होंगे, जो उन्हें पीएमजीकेएवाई के लाभों का हकदार बनाएंगे। शेखर ने कहा कि आरएफसी ने कई बार सरकार को पत्र लिखकर खाद्य सहायता सामग्री में विस्तार के लिए अनुरोध किया था, ताकि पौष्टिक आहार के लिए आवश्यक दाल, खाना पकाने का तेल और सब्जियों जैसी अन्य वस्तुओं को शामिल किया जा सके। उन्होंने कहा, ‘कुछ राज्यों ने ऐसी चीजें शामिल की हैं, लेकिन हमें केंद्र से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

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