मुख्यपृष्ठनए समाचारनिवेश गुरु: ‘एक देश : एक भाषा’; ‘एक राष्ट्र : एक विदेशी...

निवेश गुरु: ‘एक देश : एक भाषा’; ‘एक राष्ट्र : एक विदेशी भाषा’!

भरतकुमार सोलंकी

देश के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग बोलियां बोली जाती हैं। बोली भाषा की सबसे छोटी इकाई है। बोली का प्रयोग साधारण बोलचाल में किया जाता है। किसी क्षेत्र विशेष में बोली जाने वाली मौखिक भाषा बोली कहलाती है। बोली के माध्यम से शिक्षा प्रदान नहीं की जा सकती है। भाषा का उपयोग समाज में साहित्यिक, व्यापारिक, वैज्ञानिक और प्रशासनिक आदि औपचारिक कार्यों में किया जाता हैं। बोली का क्षेत्र इतना व्यापक नहीं होता है। एक समय बोलियों का उपयोग गांव तथा आस-पास के दस-बीस किलोमीटर में बसे सगे-संबंधियों तक ही सीमित रहता था। आज सामाजिक, पारिवारिक और व्यावसायिक परिस्थितियां बदल गई हैं।

बोली हर बारह कोश की दूरी पर बदलती है और हम यह भी जानते हैं कि दूर-दराज के एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश के लोगों से बातचीत में हम अपनी देशी बोली में बात नहीं कर सकते हैं इसलिए हमें एक राष्ट्रीय भाषा सीखने की जरूरत होती है। गांव में बोली जाने वाली ऐसी सैकड़ों बोलियों को राजकीय भाषा बनाना नामुमकिन है। हर जिले की एक भाषा बनाए भी तो देश में साढ़े पांच सौ से अधिक भाषाओं का निर्माण करना पड़ेगा। याद रहे, व्यक्ति के व्यक्तिगत विकास में एक भाषा का योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। व्यक्ति अथवा छात्र के पास एक भाषा पर तो पूरी पकड़ होनी ही चाहिए, छात्र जब तीन-चार से अधिक भाषाएं सीखने का प्रयास करता है तो उसकी हर भाषा आधी-अधूरी खिचड़ी बन जाती है।
आज पैदा होने वाला बच्चा पूरी जिंदगी अपने गांव-देहात में रहकर बिताने वाला तो है नहीं, फिर माता-पिता का यह कर्तव्य है कि नवजात बालक के साथ सिर्फ एक ही भाषा में बात करें, जो स्कूल में पढ़ाई जाने वाली हो, ताकि वो बड़ा होकर देश-दुनिया में कहीं भी एक राष्ट्रीय भाषा और एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा से अपना जीवन-यापन आसानी से कर सके। इसलिए बच्चे को उसी भाषा के माहौल में रखें, जिसमें वो अपने विद्यार्थी जीवन में शिक्षा ग्रहण करने वाला हो, अन्यथा उसके साथ दोहरी-तिहरी भाषा का बहुत बुरा असर पड़ सकता है।
घर में देशी स्थानीय बोली, स्कूल में हिंदी और फिर कॉलेज में अंग्रेजी भाषा के अंतर से छात्र की मानसिक स्थिति पर बहुत बुरा असर पड़ता है, इससे वह धीरे-धीरे आजीवन हीन भावना से ग्रसित हो जाता है। इसलिए नवजात बच्चे का लालन-पालन बाल्यावस्था से एक ही भाषा में करें, जिससे वो एक भाषा पर अच्छी पकड़ हासिल कर सकता है।

ऐसे में सभी देशवासी एक या दो भाषाओं पर विशेष ध्यान दें तो एक-दो भाषाओं पर हम स्पष्ट और मजबूत पकड़ हासिल कर सकते हैं। हिंदी दिवस हो अथवा शिक्षक दिवस किसी भी अवसर पर राष्ट्रीय भाषा हिंदी पर अपनी कमान मजबूत करने का संकल्प करें तो हम अपने बच्चों का भविष्य उज्ज्वल करते हुए एक राष्ट्रीय भाषा हिंदी और एक विदेशी भाषा के बलबूते विश्व के मानचित्र पर एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)

अन्य समाचार