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एक फूल, दो हाफ ने काम बिगाड़ा!

संदीप सोनवलकर
एक बड़े और २ पंचर पहियों की गाड़ी हो या सरकार उसका बैलेंस कभी भी बिगड़ सकता है। महाराष्ट्र में हर रोज यही हो रहा है। एक फूल दो हाफ दलों यानी भाजपा, शिंदे गुट और अजीत पवार गुट की मिली-जुली सरकार में एक साल हो गया है, लेकिन अब तक पूरा मंत्रिमंडल ही नहीं बन पाया है और आगे बनने की कोई उम्मीद भी नहीं दिखती है। तीन दलों की ये सरकार लगातार अपने ही बोझ तले दबती जा रही है, इसलिए हर रोज खबर उड़ती है कि ये सरकार कभी भी गिर सकती है। असल में २०१९ के चुनाव के बाद जब बीजेपी ने अचानक अजीत पवार के साथ सुबह पांच बजे ही सरकार बना ली तो वो तीन दिन भी नहीं चल पाई। उसके बाद शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की महाआघाड़ी सरकार उद्धव ठाकरे की लीडरशिप में बनी। इसके बाद भाजपा ने शिवसेना से गद्दारी करने वाले एकनाथ शिंदे की लीडरशिप में सरकार बना ली। आठ महीने तो ये सरकार ठीक चली और जब ये लगने लगा कि सरकार कुछ स्थिर हो रही है तो भाजपा ने अचानक अजीत पवार को एनसीपी से तोड़कर उनको भी सरकार में शामिल कर लिया। बस उसके बाद से सरकार में काम बिगाड़ा शुरू हो गया।
पहले तो मंत्रिमंडल में किसको क्या मिले इसको लेकर खींचतान चलती रही तो कई दिनों तक मंत्री बन ही नहीं पाए बाद में जब विस्तार हुआ तो अब तक कुल ४२ मंत्री पद में से केवल २८ भी भर पाए हैं, बाकी अब भी कई महीनों से खाली है। पहले सत्ता का बंटवारा केवल भाजपा और एकनाथ शिंदे के साथ आए करीब ४५ विधायकों में होना था, लेकिन अब अजीत पवार भी सरकार में आ गए और उनका भी दावा है कि उनके पास भी इतने ही विधायक हैं, सो खींचतान शुरू हो गई। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लगने लगा है कि अजीत पवार को लाकर उनकी ताकत कम की गई है, इसलिए पहले तो वो नाराज होकर तीन दिन अपने पैतृक गांव चले गए और आने के बाद वीडियो जारी कर कह दिया कि मुझे कोई हटा नहीं सकता। मैं ही अगला मुख्यमंत्री बनूंगा। उधर, भाजपा के कार्यकर्ता नाराज हैं कि उनको कुछ नहीं मिल रहा और बस वो मेहनत कर रहे हैं, जबकि मलाई तो एकनाथ शिंदे और अजीत पवार के मंत्री काट रहे हैं। सरकार में शामिल भाजपा के अलावा दोनों दल एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजीत पवार की एनसीपी के मंत्री कई ऐसे पैâसले ले रहे हैं और बयान दे रहे हैं कि उनका बचाव करना मुश्किल हो गया है। पिछली सरकार में पैâसला हुआ था कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना यानी बीमा योजना का विस्तार किया जाए। पिछली बैठक में अजीत पवार ने तो सीधे सीएम शिंदे के इलाके में ही एक अस्पताल में दो दिन में २५ मौत का मामला उठा दिया तो सीएम कुछ जवाब नहीं दे पाए तो फिर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बात को टालने के लिए अगला विषय आगे कर दिया। अब अफसर परेशान हैं कि किसकी सुनें और किसकी नहीं। इस बीच एक सर्वे ने इन तीन दलों की नींद उड़ा दी है, जिसमें कहा गया कि लोकसभा चुनाव होने पर तीन दलों की महायुति यानी कांग्रेस, उद्धव शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी को ४८ में से ३० तक सीट मिल सकती है, जबकि पिछली बार भाजपा शिवसेना गठबंधन को ४८ में से ४२ सीट मिली थी यानी भाजपा को बड़ा झटका लग सकता है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक मामलों के जानकार हैं।)

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