मुख्यपृष्ठनए समाचारएक झोपड़ी एक घंटा! ...मुसीबत से कम नहीं धारावी का सर्वे

एक झोपड़ी एक घंटा! …मुसीबत से कम नहीं धारावी का सर्वे

सर्वे में ‘ओटीपी’ सबसे बड़ी रुकावट

सामना संवाददाता / मुंबई
धारावी पुनर्विकास परियोजना के तहत सोमवार से डीआरपीपीएल द्वारा धारावी के कमला रमणनगर से सर्वे शुरू किया गया है। इसके अनुसार मकान मालिक के सभी दस्तावेज और जानकारी मोबाइल ऐप पर अपलोड करने के बाद इस जानकारी की पुष्टि के लिए परमिट धारक के मोबाइल फोन पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करना आवश्यक है, तभी प्रक्रिया पूरी होती है। ओटीपी नहीं आने से सर्वे करने वाले अधिकारी, कर्मचारी व मकान मालिक फंसे हुए हैं। साथ ही एक घर का सर्वे पूरा होने में एक घंटे से ज्यादा का समय लग रहा है।
धारावीकरों ने जताई नाराजगी
धारावी में ६०० एकड़ भूमि पर फैली एक लाख से अधिक झोपड़ियां हैं। धारावी पुनर्वास परियोजना प्राइवेट लिमिटेड ने १८ मार्च से झुग्गियों को सामूहिक रूप से पुनर्विकसित करने के लिए उन्हें यूनिक आईडी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। तदनुसार साढ़े तीन हजार से अधिक झोपड़ियों को यूनिक आईडी दी है और सोमवार से कमला रमणनगर में घर-घर जाकर, संबंधित झोपड़ियों को स्वैâन करना और परिवारों से जानकारी प्राप्त करना, बायोमेट्रिक फिंगर प्रिंट लेना शुरू है। इस दौरान कभी रेंज नहीं होने तो कभी ओटीपी नहीं आने से समय लग जाता है, इसलिए धारावी के लोगों ने नाराजगी जताई है। पश्चिम रेलवे के माटुंगा स्टेशन से सटे कमला रमणनगर में साक्षी सावंत की झोपड़ी को नंबर दिया गया था, इसलिए सबसे पहले उनके घर का सर्वे किया गया। इसमें लगभग पंद्रह मिनट लग गए। सर्वे के लिए टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें प्रत्येक में पांच अधिकारी शामिल हैं। इस बीच सर्वे में लगने वाले समय को देखते हुए छह-आठ महीने में पूरी धारावी का सर्वे करना एक बड़ी चुनौती है। झोपड़ी मालिक से आधार कार्ड, लाइट बिल, पुराने हस्ताक्षर की रसीद, मकान के कागजात  स्कैन किए जा रहे हैं और झेरॉक्स कॉपी भी ली जा रही है।

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