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प्रत्येक १०० में से एक है मानसिक विकार का शिकार! तेजी से बढ़ रहा स्किजोफ्रेनिया का खतरा

  • गंभीर और पुरानी है यह बीमारी

सामना संवाददाता / मुंबई
स्किजोफ्रेनिया एक पुराना मानसिक विकार है, जो हर बीतते दिन के साथ अधिक से अधिक लोगों को अपने प्रभाव में ले रहा है। यह विकृत व्यवहार, भावना, भाषा, धारणा, विचार आदि से जुड़ा हुआ है। इस मानसिक विकार के शिकार हमेशा एक आभासी वास्तविकता में रहते हैं, जो वास्तविक जीवन से मीलों दूर हैं। यह पीड़ित के व्यक्तिगत जीवन को भी प्रभावित करता है। मानसिक रोग विशेषज्ञों के मुताबिक प्रत्येक १०० में से एक व्यक्ति इस विकार का शिकार है।
किशोरावस्था में दिखने लगते हैं लक्षण
किशोरावस्था में इसके लक्षण शुरू होते हैं। व्यवहार में परिवर्तन या मनोदशा और नींद की कमी इस जटिल मानसिक विकार के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। बीमारी बढ़ने पर उपचार कठिन हो जाता है, मानसिक विकार का जल्द से जल्द इलाज किया जाना चाहिए। चिकित्सकों का मानना है कि दवा का सेवन किए बिना स्किजोफ्रेनिया का इलाज असंभव है।
काल्पनिक दुनिया में जीता है रोगी
डॉ. सुवर्णा माने के मुताबिक रोगी को थोड़ा भी भान नहीं रहता है कि उसमें कोई बदलाव हुआ है। ऐसे में वह सहज ही उपचार के लिए तैयार नहीं होता है। दूसरी तरफ इलाज न मिलने से स्किजोफ्रेनिया से जूझ रहा रोगी एक काल्पनिक दुनिया में जीता है। यह रोग आमतौर पर कई वर्षों तक रहता है या एपिसोड में होता है। प्रत्येक एपिसोड के बाद व्यक्ति की कार्यात्मक क्षमता कम होती जाती है। इस रोग के कारण विभिन्न हैं। मुख्य रूप से मस्तिष्क में रासायनिक परिवर्तन, आनुवंशिकी प्रमुख कारण हैं।
अलग-अलग दिखाई देते हैं लक्षण
साइकेट्रिक डॉ. सुवर्णा माने के मुताबिक दूसरों पर संदेह करना, यह महसूस करना कि कोई आपको देख रहा है, आपकी जान को खतरा है, आपको कंप्यूटर या कैमरों द्वारा देखा जा रहा है और यह संदेह करना कि कोई आपका पीछा कर रहा है आदि विकार के लक्षण हैं। इसके अलावा रोगी को लगता है कि उसके मन में चल रहे विचार लोगों को पता चल रहे हैं, जो मेरे नहीं दूसरों के हैं। इतना ही नहीं उन्हें लगता है कि उनके मस्तिष्क में एक चिप लगाई गई है। इसके साथ ही कोई पास न होते हुए भी आवाज सुनाई देना और ऐसा लगता कि वह आवाज सही है। इसके अलावा रोगी के खुद ही हंसते और मुस्कुराते रहना, आक्रामकता, अकेलापन, व्यक्तिगत स्वच्छता की कमी, ठीक से काम करने में असमर्थता आदि लक्षणों का समावेश है।

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