मुख्यपृष्ठसमाचारअमरनाथ यात्रा की सकुशलता की खातिर चाहिए एक लाख सुरक्षाकर्मी!

अमरनाथ यात्रा की सकुशलता की खातिर चाहिए एक लाख सुरक्षाकर्मी!

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू। कश्मीर की स्थिति में आने वाले सुधार के दावों के बावजूद सुरक्षाधिकारी अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के प्रति कोई ढील देकर खतरा मोल लेने के पक्ष में नहीं हैं। यही कारण है कि अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा की खातिर एक लाख के करीब सुरक्षाकर्मियों को जुटाने की कवायद अभी से आरंभ हो गई है।

आधिकारिक तौर पर २५० के करीब सुरक्षाबलों की कंपनियां यात्रा की सुरक्षा के लिए केंद्र से मांगी गई हैं। इनमें सीमा सुरक्षाबल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान होंगे जबकि सेना तथा राज्य पुलिस के जवानों को अतिरिक्त तौर पर तैनात किया जाएगा।

अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अधिकारी कहते हैं कि इस बार अमरनाथ यात्रा में जबरदस्त भीड़ की उम्मीद है। ३० जून से आरंभ होने वाली अमरनाथ यात्रा ११ अगस्त श्रावण पूर्णिमा के दिन तक चलेगी। शामिल होने वालों की कोई संख्या निर्धारित नहीं की गई है। भाग लेनेवालों के लिए कोई शर्त भी नहीं है सिवाय हेल्दी होने के। पर गैर सरकारी अनुमान के तौर पर १० लाख से अधिक को शामिल होने का न्योता दिया गया है।

अधिकारी यात्रा की सुरक्षा को लेकर इसलिए चिंतित हैं क्योंकि एक तो पिछले कई सालों से यात्रा घटनारहित चल रही थी, जो आईएसआई की आंख की किरकिरी बन चुकी है तो दूसरा यह चर्चा आम है कि इस बार कश्मीर में गर्मियां आतंकवाद के मोर्चे पर हाट होंगी क्योंकि जम्मू कश्मीर को बांटने की कवायद के बाद आतंकी कुछ अधिक कर पाने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं और अब दो सालों के उपरांत आरंभ होनेवाली अमरनाथ यात्रा आतंकियों के लिए आसान निशाना हो सकती है।

ऐसे में सुरक्षा का सबसे अधिक भार केरिपुब के कंधों पर होगा। पहले ही जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाइवे की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर है। केरिपुब के प्रवक्ता का कहना था कि कई जिम्मेदारियां होने से जवानों की संख्या कम पड़ रही है। आतंकवाद विरोधी ग्रिड से जवानों की संख्या कम नहीं की जा सकती। अत: केंद्रीय गृहमंत्रालय से आग्रह किया गया है।

सेना भी अपनी अहम भूमिका निभाएगी। जम्मू-पठानकोट तथा जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाइवे पर केरिपुब के जवानों का साथ जम्मू कश्मीर पुलिस देगी तो जम्मू-पठानकोट राजमार्ग के पाकिस्तानी सीमा से सटे इलाकों में बीएसएफ की मदद ली जाएगी। इसी प्रकार अमरनाथ यात्रा के पड़ावस्थलों के आस-पास के पहाड़ों की सुरक्षा का जिम्मा सेना के हवाले कर दिया जाएगा।

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