मुख्यपृष्ठनए समाचारप्याज उत्पादक किसानों की बल्ले-बल्ले! ...४५ हजार टन का किया निर्यात

प्याज उत्पादक किसानों की बल्ले-बल्ले! …४५ हजार टन का किया निर्यात

सामना संवाददाता / मुंबई
केंद्र की मोदी सरकार द्वारा किसानों के प्याज निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से किसानों की आर्थिक हालत पतली हो गई थी। लोकसभा चुनाव में किसानों की नाराजगी को देखते हुए मोदी सरकार ने मई २०२४ की शुरुआत में प्याज के निर्यात से प्रतिबध हटा दिया था। प्रतिबंध हटने के बाद ४५,००० टन से ज्यादा प्याज का निर्यात किया गया है। यह जानकारी एक बड़े सरकारी अधिकारी ने गत दिवस दी।
दुनिया के सबसे बड़े सब्जी निर्यातक ने गत दिसंबर में प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था और फिर सुस्त उत्पादन के चलते कीमतों में वृद्धि के बाद मार्च में इसे बढ़ा दिया था। मीडिया की खबर के मुताबिक, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की सचिव निधि खरे ने कहा कि प्रतिबंध हटने के बाद से ४५,००० टन से अधिक प्याज का एक्सपोर्ट किया गया है।

४ मई को हटाया था बैन
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, प्याज का ज्यादातर निर्यात पश्चिम एशिया और बांग्लादेश को किया गया। सरकार ने चुनाव के दौरान प्याज की कीमतें कम रखने के लिए ४ मई को प्रतिबंध हटा दिया था। हालांकि, प्रति टन पर ५५० अमेरिकी डॉलर का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) लगाया गया था। खरे ने कहा कि इस साल अच्छे मानसून के पूर्वानुमान से जून से प्याज सहित खरीफ (ग्रीष्मकालीन) फसलों की बेहतर बुआई सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की एजेंसियों ने चालू वर्ष के लिए लक्षित ५,००,००० टन का भंडार (बफर स्टॉक) रखने के लिए हालिया रबी (सर्दियों) की फसल से प्याज की खरीद शुरू कर दी है।

प्याज उत्पादन को लेकर क्या है अनुमान
कृषि मंत्रालय के प्राथमिक अनुमान के मुताबिक, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में कम उत्पादन के कारण फसल वर्ष २०२३-२४ में देश का प्याज उत्पादन सालाना आधार पर १६ प्रतिशत घटकर २.५४ करोड़ टन रहने की उम्मीद है। प्याज की पैदावार भारत में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में होती है। कुछ महीने पहले प्याज की कीमत आसमान छूने लग गई थी। तब बताया गया था कि मौसम संबंधी वजहों से खरीफ प्याज की बुवाई में देरी हुई जिससे इसकी खेती का रकबा घट गया और फसल देर से पहुंची।

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