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ऑनलाइन `दिवाली’ ने निकाला छोटे व्यापारियों का दिवाला! …त्योहारों पर ऑनलाइन कंपनियों ने किया अरबों का कारोबार

आज के इस डिजिटल दौर में ऑनलाइन शॉपिंग का क्रेज ज्यादा देखने को मिल रहा है। समय बचाने के उद्देश्य से लोग ऑनलान शॉपिंग पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। इससे ऑनलाइन व्यापार तेजी से मजबूत हो रहा है, तो इसी के साथ छोटे-मझोले दुकानदारों पर उनकी रोजी-रोटी छिनने का खतरा भी मंडराने लगा है। हालांकि, दिवाली का त्योहार खत्म हो गया है। इस बीच पूरे देशभर में दिवाली पर लाखों करोड़ का कारोबार हुआ है, जिसमें ऑनलाइन ई-कॉमर्स ने जमकर कमाई की है। दिवाली पर ऑनलाइन कंपनियों के व्यापार में भी जबरदस्त उछाल आया है। फेस्टिव सीजन की बिक्री ने ऑनलाइन शॉपिंग में तेजी ला दी है। वहीं, इस दौरान ऑनलाइन ई-कॉमर्स पर खाने-पीने, किराना और आभूषण जैसी चीजों की भी खूब बिक्री हुई है। भले ही ऑफलाइन रिटेल पूरी ताकत से काम कर रहा है, कंसल्टिंग फर्म ग्रांट थॉर्नटन हिंदुस्थान के डेटा का अनुमान है कि २०२२ में ४५ फीसद के मुकाबले कुल फेस्टिव सेल का ५० फीसद से ज्यादा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए आया है।
बढ़ते ऑनलाइन कारोबार की वजह से लोकल दुकानदारों की चिंताएं बढ़ गई हैं। व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन कंपनियों ने जिस तेजी से अपना जाल बिछाया है, उससे पालघर, बोईसर, दहाणू, वसई, विरार सहित कई क्षेत्रों में हजारों दुकानों पर बंद होने का खतरा मंडराने लगा है।
ऑनलाइन बाजार में अलग-अलग क्षेत्रों में ५० से ७० फीसदी प्रतिवर्ष तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इससे खुदरा और असंगठित क्षेत्र में करोड़ों लोगों की नौकरियों पर खतरा पैदा हो गया है। त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही ऑनलाइन कंपनियां नए लोगों की भर्ती कर मांग पूरी करने की कोशिश कर रही हैं, तो खुदरा व्यापारी दुकानों में अभी भी ग्राहकों का इंतजार कर रहा है।
दुकानदारों के ग्राहक हो गए कम
त्योहारी सीजन में बाजार में दुकानों पर भीड़ देखी गई पर अब यह भीड़ कुछ सालों पहले जैसी नहीं है। ऑनलाइन शॉपिंग साइटों ने इन लोकल दुकानदारों के हिस्से से कई ग्राहक कम कर दिए हैं। भारतीय ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स के बाजार में साल २००७ में फ्लिपकार्ट और फिर साल २०१३ में अमेजन के उतरने के बाद से ही इन लोकल दुकानदारों की बिक्री कम होने लगी है। लोगों का कहना है कि जब ग्राहकों को इन दुकानों की तुलना में सस्ता सामान जब फ्लिपकार्ट, अमेजन पर उपलब्ध है तो वह क्यों इन लोकल दुकानदारों के पास जाएगा।

दुकानों का भाड़ा और बिजली बिल की कीमतें बढ़ने से व्यापारी पहले से ही परेशान है। ऐसे में विदेशी कंपनियों की तेजी से बढ़ती घुसपैठ से स्थानीय दुकानदारों का रोजगार खत्म होने की कगार पर है। लोगों को स्थानीय दुकानदारों से ही सामान खरीदना चाहिए।
महावीर सोलंकी – बोईसर व्यापारी एसोसिएशन

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