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जर्जर इमारतों को सिर्फ नोटिस पर नोटिस!

तीन वर्षों से लोगों की जान पर मंडरा रहा है खतरा
वसई-विरार में १,०४८ जर्जर इमारतें
इनमें रह रहे हैं कुल ८,९४६ परिवार
वसई-विरार शहर में खतरनाक इमारतों की समस्या दिन-ब-दिन जटिल होती जा रही है। महानगरपालिका द्वारा इन इमारतों को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं लेने से हजारों परिवार मौत के साए में हैं। मनपा के वर्ष २०१९ के आंकड़ों के अनुसार, शहर में १,०४८ इमारतों में ८,९४६ परिवार रहते हैं। पिछले दो वर्षों में इन जर्जर इमारतों की संख्या बढ़ी है और अब जर्जर इमारतों में लगभग १२,००० से अधिक परिवार रह रहे हैं। बताया जाता है कि पिछले तीन वर्षों से इन इमारतों को सिर्फ नोटिस पर नोटिस दी जा रही है। कोई ठोस कार्रवाई न होने की अवस्था में हजारों लोगों की जान पर खतरा मंडरा रहा है।
नागरिकों का जीवन खतरे में 
वसई-विरार शहर मनपा की उपेक्षित नीति का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। हर साल खतरनाक इमारतों की बढ़ती संख्या के बावजूद मनपा इस संबंध में कोई निर्णय नहीं ले रही है। महानगरपालिका हर बार केवल नोटिस दे रही है। उसके बाद मनपा इमारतों का वर्गीकरण कर अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। कोरोना काल में शहर की खतरनाक इमारतों का सर्वे अभी तक पूरा नहीं हुआ है। इसने शहर में कई खतरनाक इमारतों ने नागरिकों के जीवन को खतरे में डाल दिया है।
मानसून के दौरान ढहने की आशंका 
२०१९ की रिपोर्ट के अनुसार वसई-विरार मनपा के ९ वार्डों में १,०४८ खतरनाक इमारतें पंजीकृत की गई थीं। इनमें से १९८ जर्जर इमारतों को तत्काल तोड़ना था। लेकिन महानगर पालिका ने केवल १० से १२ इमारतों पर ही तोड़क कार्रवाई की है। ३६० इमारतों को खाली करके मरम्मत की जानी है। ३५२ भवनों को बिना खाली कराए मरम्मत की जानी है। इन सभी खतरनाक इमारतों में अभी भी ६,८४० परिवार रहते हैं और इनमें ७०० से अधिक दुकानें हैं। इनमें से अधिकांश इमारतों के मानसून के दौरान ढहने की आशंका है।
आसपास की इमारतों को भी खतरा 
मनपा ने नोटिस देकर खतरनाक भवनों को गिराने का आदेश दिया है। लेकिन इस समय कोरोना काल में कई लोगों की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के चलते दूसरी जगह पलायन की संभावना नहीं है। कई इमारतों को खतरनाक घोषित कर महानगरपालिका द्वारा ध्वस्त कर दिया गया है। ध्वस्त इमारतों के कई परिवार सालों से किराए के मकान में रह रहे हैं। इन खतरनाक इमारतों से आसपास की इमारतों तथा अन्य निवासियों को भी जान का खतरा है। पिछले ३ साल से मनपा इन इमारतों को खतरनाक घोषित करके सिर्फ नोटिस पर नोटिस जारी कर रही है।