मुख्यपृष्ठनए समाचारएक ही जिद...वाढ़वण बंदरगाह हो रद्द

एक ही जिद…वाढ़वण बंदरगाह हो रद्द

– दगाबाज सरकार पर फूटा भूमिपुत्रों का गुस्सा

– मछुआरों के बच्चों ने परियोजना के खिलाफ सरकार की निकाली शव यात्रा

योगेंद्र सिंह ठाकुर / पालघर

जिले के दहाणू में प्रस्तावित वाढवण बंदरगाह परियोजना के विरोध में मछुआरों के साथ ही अब उनके बच्चे भी कूद पड़े हैं। वाढवन के बाद पालघर की मुरबे खाड़ी में एक और बंदरगाह के निर्माण की खबर सुनकर मछुआरे भड़क गए है और उन्होंने बंदरगाह परियोजना के खिलाफ विरोध तेज कर दिया है।
धाकटी दहाणू गांव के मछुआरों के छोटे-छोटे बच्चों ने राज्य सरकार के खिलाफ विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। उन्होने सरकार की शव यात्रा निकाली और राज्य के मुख्यमंत्री और दोनों मुख्यमंत्रियों का पुतला पंâूका और बंदरगाह परियोजना को तत्काल रद्द करने की मांग की। विरोध में शामिल रहे बच्चे विनाशकारी बंदरगाह वापस जाओ बंदरगाह रद्द करो के नारे लगा रहे थे। वाढ़वन बंदरगाह को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद मछुआरों और आदिवासियों ने बंदरगाह परियोजना के खिलाफ संघर्ष और तेज कर दिया है।
पालघर जिले में भूमिपुत्रों का सरकार विरोधी आक्रोश हर जगह देखा जा रहा है। हाल ही में बंदरगाह विरोधी संगठनों ने मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग को ढाई घंटे तक अवरुद्ध कर चक्का जाम कर दिया था।
मुरबे खाड़ी में एक और नया बंदरगाह बनाने की हलचल के बीच मछुआरों का कहना है, कि इससे उनका अस्तित्व ही खतरे में आ जाएगा।
पर्यावरण और समुद्री जैव विविधता के लिए हानिकारक सामान इस बंदरगाह में उतारे जाएंगे। इसके कारण दहाणू और पालघर तालुका के मछुआरे अपना पीढ़ीगत मछली पकड़ने का व्यवसाय हमेशा के लिए खो देंगे।

झुकेंगे नहीं मछुआरे
मछुआरों के नेताओं ने कहा कि बंदरगाह परियोजना को पूरा करने के लिए सरकार की ओर से अपनाई गई। अवैध नीतियों के खिलाफ आगे और भी बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। अखिल महाराष्ट्र मछुआरा कृति समिति के अध्यक्ष देवेंद्र तांडेल ने कहा कि अगर परियोजना हम पर जबरन थोपी जाती है तो हम इसका कड़ा विरोध करेंगे। मछुआरों का कहना है कि न हम झुकेंगे और न ही टूटेंगे। परियोजना के रद्द होने तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

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