मुख्यपृष्ठनए समाचारपार्टी विरोधी कृत्य के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार सिर्फ पक्षप्रमुख को ही!

पार्टी विरोधी कृत्य के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार सिर्फ पक्षप्रमुख को ही!

शिवसेना की दृढ़ भूमिका

लगातार छठे दिन सुनवाई

सामना संवाददाता / मुंबई

पार्टी विरोधी कृत्य कर शिवसेना पार्टी छोड़कर जाने पर कार्रवाई करना आवश्यक था और पार्टी विरोधी कृत्य किए जाने पर हटाने का अधिकार शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे को ही है। ऐसी दृढ़ भूमिका शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख प्रतोद सुनील प्रभु ने कल रखी। विधायकों की अयोग्यता को लेकर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के समक्ष चल रही सुनवाई का कल छठा दिन था। शिंदे गुट के वकील महेश जेठमलानी ने दिनभर सुनील प्रभु से जिरह की। सुनील प्रभु से जिरह शुक्रवार और शनिवार को भी जारी रहेगी। एकनाथ शिंदे को जारी व्हिप के मुद्दे पर महेश जेठमलानी ने सुनील प्रभु से जिरह जारी रखी।
विधिमंडल की किताब में एकनाथ शिंदे का ई-मेल
एकनाथ शिंदे को २२ को व्हिप भेजा और २३ जून को व्हिप ई-मेल किया। लेकिन आपने जो मेल भेजा है, उसकी तारीख २३ जून है, ऐसा सवाल महेश जेठमलानी ने किया। इस पर सुनील प्रभु ने बताया कि २२ जून को मेल भेजने की सूचना दी थी, लेकिन ई-मेल २३ तारीख को गया होगा। एकनाथ शिंदे के ई-मेल आईडी का जिक्र करते हुए महेश जेठमलानी ने कहा कि जिस ई-मेल पर उन्होंने पत्र भेजा था, उसका इस्तेमाल एकनाथ शिंदे ने कभी नहीं किया या यह उनके कार्यालय का ई-मेल आईडी नहीं था, यह कहना गलत है। विधानमंडल की पुस्तक में सभी के ई-मेल आईडी मौजूद हैं। शिवसेना विधिमंडल पक्ष के कार्यलय की ओर से सचिव यह ई-मेल आईडी देते हैं। इसलिए विधिमंडल की पुस्तक में मौजूद ई-मेल आईडी के आधार पर मेल किया था, ऐसा सुनील प्रभु ने जवाब दिया।
प्रतिनिधि सभा में मतदान किया
पार्टी संविधान, प्रतिनिधि सभा और नियुक्तियों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए सुनील प्रभु ने कहा कि नेता कौन हो, इसका फैसला पार्टी की प्रतिनिधि सभा में होता है। २०१३ में आप प्रतिनिधि सभा का हिस्सा बने थे क्या और जब आप मेयर थे तो मेयर को प्रतिनिधि सभा का हिस्सा बनने की
इजाजत नहीं थी। यह गलत है। मैं मेयर था या नहीं, लेकिन मैं प्रतिनिधि सभा का सदस्य था। मैंने वोट देने के अपने अधिकार का प्रयोग किया है। २०१८ और २०१३ के बीच, पार्टी अंतर्गत कोई चुनाव नहीं हुए। शिवसेनापक्षप्रमुख के रूप में उद्धव ठाकरे का चुनाव पार्टी के संवैधानिक दृष्टि से वैध नहीं था। महेश जेठमलानी ने पूछा कि क्योंकि पार्टी संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, तो सुनील प्रभु ने जवाब दिया कि यह गलत है। सुनील प्रभु ने इस सवाल का जवाब हां में दिया कि क्या शिवसेना को ऐसी पार्टी के साथ गठबंधन करने की अनुमति है जो उसके संविधान और विचारधारा के खिलाफ है।
संपर्क प्रमुख के रूप में प्रभु का मतदान
विधान भवन के बाहर मीडियाकर्मियों से बात करते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता सांसद अनिल देसाई ने बताया कि सुनील प्रभु ने शिवसेना की प्रतिनिधि सभा में संपर्क प्रमुख के तौर पर मतदान किया था। पार्टी के अंदर चुनाव के संबंध में एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि उनका दावा सच नहीं है, क्योंकि उन्होंने कहा था कि कोई पार्टी नहीं है। हर पार्टी में आंतरिक चुनाव होते हैं। वर्ष २०१८ में चुनाव आयोग के नियमानुसार चुनाव हुआ था। चुनाव अधिकारी ने वहां जाकर इसका पूरा रिकॉर्ड बनाया और संविधान में संशोधन किया और पत्र के माध्यम से आयोग को प्रस्ताव भी भेजा। हमने चुनाव आयोग को २३ जनवरी २०१८ का वीडियो भी भेजा है। अनिल देसाई ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि हमने चुनाव आयोग की आवश्यकताओं को पूरा किया है।

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