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असम में खुलेआम लोकतंत्र की हत्या : भाजपा को वोट दो नहीं तो होगी ‘बुलडोजर कार्रवाई’ … भाजपा उम्मीदवार सहित अधिकारियों पर धमकाने का आरोप

 कोर्ट के आदेश के बाद हुआ मामला दर्ज  
देशभर में लोकसभा चुनाव को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। राजनीतिक पार्टियां मतदाताओं को लुभाने के लिए तमाम हथकंडे अपना रही हैं, लेकिन भाजपा लोगों को धमका कर वोट हासिल करना चाह रही है। मामला असम का है, जहां करीमगंज संसदीय क्षेत्र के एक गांव में रहनेवाले ग्रामीणों को अपने पक्ष में वोट करने के लिए धमकाया ़गया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को वोट न देने पर ‘बुलडोजर कार्रवाई’ के लिए तैयार रहने की धमकी दी गई थी। डरे हुए ग्रामीणों ने स्थानीय अदालत का दरवाजा खटखटाया है। जिसके बाद भाजपा उम्मीदवार कृपानाथ मल्लाह के साथ ही असम वन विभाग के नौ अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई। बता दें कि इस सीट पर शुक्रवार (२६ अप्रैल) को मतदान हुआ है।
घर-घर जाकर की लोगों से पूछताछ
रिपोर्ट्स के अनुसार, गांव के रहनेवाले लोगों ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि ‘काले कपड़ों में कई अन्य वन कर्मचारी, पुलिसकर्मी, असम पुलिस कमांडो और वन विभाग के कुल ४० से ४५ व्यक्ति थे, जिन्होंने धमकी दी है। शिकायतकर्ताओं की मानें तो चुनाव के पहले से ये सभी अन्य गांवों में दिन और रात में घर-घर जाकर लोगों से पूछताछ किया। उन्हें घर से बाहर बुलाकर उनके घर की तस्वीरें लीं और उनसे भाजपा उम्मीदवार को वोट देने के लिए कहा। साथ ही धमकी भी दी कि अगर वे लोग ऐसा नहीं करते तो ४ जून, २०२४ (वोटों की गिनती) के बाद उन्हें घरों से बेदखल कर दिया जाएगा।
अपमानजनक भाषा का किया इस्तेमाल
याचिका में यह भी कहा गया है कि आरोपी इन लोगों के लिए रिफ्यूजी, ‘बंगाल से आए लोग’ जैसी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल भी किया। इन सभी लोगों से भाजपा उम्मीदवार को वोट देने के लिए कहा गया और यह भी कहा गया है कि यदि ये लोग चाहते हैं कि यहां घर में शांति और खुशी से रहें, तो इन्हें भाजपा उम्मीदवार को वोट देना होगा, नहीं तो घरों पर ‘बुलडोजर कार्रवाई’ होगी।’
 ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह भी बताया कि उनके पास घटना की कई तस्वीरें और वीडियो क्लिप हैं और इन लोगों ने अदालत से आग्रह किया कि उन्हें ‘मामले की उचित सुनवाई के लिए पेश करने की अनुमति दी जाए।’ इसे ‘आरोपियों द्वारा जान-बूझकर दी गई आपराधिक धमकी और अपमान’ बताते हुए ग्रामिणों ने एक स्वतंत्र प्राधिकारी से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

 

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