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अस्पतालों में हो रही मौतों पर आक्रामक हुआ विपक्ष! … शिवसेना ने की स्वास्थ्यमंत्री के इस्तीफे की मांग

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र के अस्पतालों में मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नांदेड़ के अस्पताल में ३६ घंटे में ३१ मौतों के बाद संभाजीनगर के घाटी अस्पताल में भी १४ मौतों का मामला सामने आया है। उक्त घटना को लेकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी के ठाणे जिलाप्रमुख केदार दिघे, राकांपा अध्यक्ष शरद पवार, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण सहित अन्य नेताओं ने ईडी सरकार पर जमकर हमला बोला है।
निष्क्रिय स्वास्थ्य मंत्री इस्तीफा दें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के ठाणे जिलाप्रमुख केदार दिघे ने मांग की है कि ठाणे के सिविल अस्पताल के बाद नांदेड़ और घाटी के अस्पताल में मरीजों की मौत के बाद निष्क्रिय स्वास्थ्य मंत्री तानाजी सावंत को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के ऑडिट की भी जरूरत है। सरकार ने वादा किया था कि ठाणे घटना के बाद एक रिपोर्ट सौंपी जाएगी। लेकिन रिपोर्ट अब तक प्रस्तुत नहीं की गई है। दिघे ने प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा कि नांदेड़ और छत्रपति संभाजीनगर के अस्पतालों के मामले में भी ऐसी ही स्थिति होने की संभावना है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों के तबादलों की साजिश
घाटी अस्पताल में मरीजों को मौत से बचाने वाले विशेषज्ञ डॉक्टर घाटी अस्पताल की पहचान हैं। उन पर स्थापित विश्वास के चलते ही राज्य के लगभग १८ जिलों से मरीज यहां इलाज कराने के लिए आते हैं। घाटी के निजीकरण का सपना देखनेवाली ईडी सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने अचानक सभी विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टरों का तबादला कर दिया। तबादलों का यह गोलमाल अभी भी खत्म नहीं हुआ है। इससे मरीजों के साथ ही डॉक्टरों को भी परेशानी हो रही है।
दवाओं की कमी बनी मुसीबत
ईडी सरकार की गलत नीति के कारण घाटी में साल भर से दवाइयों की कमी बनी हुई है। हालांकि, कई संस्थाओं और दानवीरों की मदद से दवाओं की अस्थायी व्यवस्था की जा रही है, क्योंकि सरकार दवाएं खरीदने का नाम नहीं ले रही है। दवाओं की कमी घाटी अस्पताल के लिए मुसीबत बन गई है। इसके कारण कई मरीज बेमौत मर रहे हैं।
‘हाफकिन’ का पेमेंट है बकाया
घाटी में लगनेवाली दवाएं और उपकरण की आपूर्ति करने का काम सरकार की हाफकिन कंपनी के पास है। हालांकि, साल भर में ईडी सरकार ने ३० करोड़ की खरीदारी की, जिसमें से सिर्फ ५ करोड़ का ही भुगतान किया गया। खबर है कि बाकी २५ करोड़ बकाया होने पर सरकारी स्वामित्ववाली कंपनी हाफकीन ने सप्लाई बंद कर दी है।
अस्पताल निजीकरण करने की चाल
ईडी सरकार द्वारा अस्पताल में ५ मंजिला सुपरस्पेशियलिटी विंग की शुरुआत की गई। महंगी मशीनें लगाई गर्इं। लेकिन स्टाफ की भर्ती नहीं की गई। तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री गिरीश महाजन की वक्रदृष्टि इस विंग पर जबसे पड़ी है, तबसे भाजपा इस विंग के निजीकरण की चाल चल रही है।

मन को झकझोर देनेवाली घटना
सोशल मीडिया साइट एक्स पर शरद पवार ने लिखा कि नांदेड़ के सरकारी अस्पताल में ४८ घंटों में १२ नवजात शिशुओं सहित ४२ मरीजों की मौत की दुर्भाग्यपूर्ण घटना को अभी एक दिन भी नहीं बीता है, उसी समय संभाजीनगर के घाटी अस्पताल में २ नवजात शिशुओं सहित १४ मरीजों की मौत हो गई। राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने पोस्ट करते हुए लिखा है कि नांदेड़ के एक सरकारी अस्पताल में मरने वालों का आंकड़ा ३१ तक पहुंच गया है। इसके अलावा ७० लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसमें १२ बालकों का समावेश बताया जा रहा है। यह चौंकानेवाली घटना है। ठाणे के कलवा अस्पताल में भी पिछले दिनों ऐसी ही एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी। उस घटना को गंभीरता से न लेने के कारण ही नांदेड़ में ३१ लोगों की मौत हो गई। यह सरकार की विफलता है। उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि शिशुओं सहित ३१ लोगों की मौत की दुर्भाग्यपूर्ण घटना सचमुच मन को झकझोर देनेवाली है। उन्होंने कहा कि अभी दो महीने पहले ही ठाणे मनपा के कलवा अस्पताल में एक ही रात में १८ लोगों की मौत की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी।

अज्ञात जहर से हुई है मौतें!
कांग्रेस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि जीएमसीएच के डीन ने उन्हें २४ लोगों की मौत के बारे में बताया है। अस्पताल के डीन से मिली जानकारी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘जिन २४ लोगों की मौत हुई है, उनमें से ६-७ नवजात थे और कुछ गर्भवती महिलाएं थीं। अन्य ७० मरीजों की हालत गंभीर है। कुछ लोगों की मौत अज्ञात जहर संबंधी कारण से हुई। ‘चव्हाण ने कहा कि एकनाथ शिंदे सरकार को प्राथमिकता के आधार पर नांदेड़ जीएमसीएच के लिए मेडिकल स्टाफ के साथ-साथ धन की व्यवस्था करनी चाहिए। चव्हाण ने कहा कि अस्पताल में ५०० बिस्तर हैं, लेकिन फिलहाल लगभग १,२०० मरीज भर्ती हैं।

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