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ऑर्डर…ऑर्डर… मनमानी नहीं चलेगी,  ईडी पर चला ‘सुप्रीम हथौड़ा’!

गिरफ्तारी के वक्त आरोपी को लिखित में बताओ कारण
सर्वोच्च न्यायालय ने दिया आदेश
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए ‘ईडी’ सरकार का प्रमुख हथियार बन चुकी है। सरकार जब चाहती है कोई भी मामला बनाकर विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर लेती है। कल भी ईडी ने ‘आप‘ नेता सांसद संजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की मनमानी पर उसकी तगड़ी क्लास लेते हुए उसे आदेश दिया है कि गिरफ्तारी के वक्त उसे आरोपी को कारण बताना जरूरी है, वह भी लिखित में। उम्मीद है कि इससे ईडी की मनमानी पर कुछ लगाम लग सकेगी।
एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईडी एक अहम जांच एजेंसी है। उस पर जिम्मेदारी है कि आर्थिक अपराध को रोके। ईडी के तमाम एक्शन में पारदर्शिता दिखनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए.एस. बोपन्ना की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, ‘यह जरूरी है कि आरोपी को गिरफ्तारी के बारे में बताया जाए कि उसकी गिरफ्तारी का आधार क्या है। यह लिखित में बताना जरूरी है। इसके लिए कोई अपवाद नहीं हो सकता।’ बता दें कि गुड़गांव की एक रियल इस्टेट कंपनी के डायरेक्टर पंकज बंसल और बसंत बंसल की गिरफ्तारी को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था दी है। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी के उस रवैए पर भारी नाराजगी जताई, जिसके तहत उसने मौजूदा मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के वक्त उन्हें लिखित में गिरफ्तारी का कारण नहीं बताया था।

संविधान का उल्लंघन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईडी ऑफिसर ने सिर्फ गिरफ्तारी के ग्राउंड पढ़े थे। इस तरह की कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद-२२ (१) और प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा-१९ (१) के तहत तय की गई अनिवार्यता को पूरा नहीं करती। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी द्वारा की गई गिरफ्तारी को अवैध करार दिया और निर्देश दिया कि डायरेक्टरों को रिहा किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, घटनाक्रम बताता है कि ईडी का क्रियाकलाप ठीक नहीं था। ईडी के बर्ताव से मनमानेपन की बू आ रही है।

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