मुख्यपृष्ठनए समाचारहमारा संविधान अवैध फिर हमारे विधायक वैध कैसे?- उद्धव ठाकरे का सवाल

हमारा संविधान अवैध फिर हमारे विधायक वैध कैसे?- उद्धव ठाकरे का सवाल

सामना संवाददाता / मुंबई
सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए वक्त के भीतर निर्णय लेना चाहिए था, लेकिन न्यायालय के निर्देशों को विधानसभा अध्यक्ष ने पैरों तले रौंद दिया। महाशक्ति का समर्थन होने के कारण हम सुप्रीम कोर्ट की भी नहीं सुनते हैं, यह आज के निर्णय से साफ हो गया है। ऐसा जोरदार हमला कल शिवसेना पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने विधायकों की अयोग्यता मामले पर फैसला आने के बाद किया। उन्होंने कहा कि नार्वेकर ने निर्लज्जता की हद पार करके लोकतंत्र की हत्या कर दी है। शिवसेना केवल बालासाहेब ठाकरे की है, यह छोटे से छोटा बच्चा भी बता देगा। जनता यह अन्याय सहन नहीं करेगी। शिवसेना गद्दारों की नहीं हो सकती, ऐसा उद्धव ठाकरे ने डंके की चोट पर कहा। यह सर्वोच्च न्यायालय का अपमान है और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे, ऐसा भी उद्धव ठाकरे ने कहा। विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कल विधायक अयोग्यता मामले का नतीजा सुनाया। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने ‘मातोश्री’ में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मूल मामला अयोग्यता का था, लेकिन किसी को भी अयोग्य नहीं ठहराया गया था, वहीं अगर शिवसेना के संविधान को स्वीकार नहीं किया गया तो शिवसेना के विधायकों को अयोग्य क्यों नहीं ठहराया गया, ऐसा सवाल भी उद्धव ठाकरे ने किया।

कैसे दल बदलना है, यह नार्वेकर ने दिखा दिया! -उद्धव ठाकरे की दो टूक

विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कल विधायक अयोग्यता मामले का नतीजा सुनाया। इसके बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने ‘मातोश्री’ में प्रेस कॉन्प्रâेंस बुलाकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उद्धव ठाकरे ने नार्वेकर की कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए कहा कि नार्वेकर को दल-बदल विरोधी कानून को मजबूत करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने इसे राजमार्ग बना दिया। उन्होंने दिखा दिया कि कैसे दलबदल करना है, क्योंकि उन्हें दल बदलने का अनुभव है और वे आगे का रास्ता भी साफ कर रहे हैं। हो सकता है कि वे भविष्य में पार्टी बदलना चाहें, ऐसा सीधा आरोप उद्धव ठाकरे ने लगाया।
शिवसेना का संविधान चुनाव आयोग को कब का दिया गया है…
संविधान में बदलाव किया गया है। घातियों द्वारा लगाए आरोप की भी उद्धव ठाकरे ने अच्छी खबर लेते हुए कहा कि हमने चुनाव आयोग को शिवसेना का संविधान सौंप दिया है। पहले शिवसेनाप्रमुख का पद था, जिसे मैंने शिवसेनापक्षप्रमुख किया, क्योंकि बालासाहेब के अलावा कोई दूसरा शिवसेनाप्रमुख हो ही नहीं सकता। यह हमारी पार्टी का मानना है। तत्कालीन चुनाव आयोग ने हमें मान्यता दी है। वर्ष २०१३ में मैं पक्षप्रमुख बना, तब भी चुनाव आयोग को संविधान दिया था और वर्ष २०१८ में भी दिया था। ऐसा उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया।
फडणवीस भी कोर्ट का अपमान कर रहे
फडणवीस कह रहे हैं कि सरकार पूरी तरह संवैधानिक तरीके से बनी है, मीडिया द्वारा पूछे जाने पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि फडणवीस सुप्रीम कोर्ट का भी अपमान कर रहे हैं। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तत्कालीन राज्यपाल द्वारा उठाए गए कदम गलत थे और उन्होंने उन्हें सिर्फ इसलिए मंजूरी दी थी, क्योंकि वे अक्षम थे। इसका मतलब है कि यह सरकार वैध नहीं है, ऐसा भी उद्धव ठाकरे ने कहा।
‘घाती’ गुलाम…उनकी गुलामी शुरू हो गई है
वंशवाद खत्म हो गया है, विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ऐसी प्रतिक्रिया दी। जब मीडिया ने इस बारे में पूछा तो उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह प्रतिक्रिया भी मुख्यमंत्री की तरह ही है। अगर वे कह रहे हैं कि वंशवाद खत्म हो गया है, तो उनकी गुलामी शुरू हो गई है, गुलाम तो गुलाम हैं, ऐसा भी उद्धव ठाकरे ने कहा।
गोगावले की जैकेट फ्री है
जब भरत गोगावले का मुद्दा पत्रकारों ने उठाया तो उद्धव ठाकरे ने जवाब दिया कि उनका विषय छोड़िए, उन्हें लगता है कि उन्हें एक दिन के लिए मंत्री पद मिल जाएगा, उनकी जैकेट प्रâी है और मानक बदलने शुरू हो गए हैं।

… मैच फिक्स था
शिंदे की शिवसेना ही असली शिवसेना है, ऐसा भी निर्णय विधानसभा अध्यक्ष ने दिया। उस पर, ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि शिंदे और शिवसेना का रिश्ता टूट गया है, ऐसा उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट शब्दों में कहा। न्यायाधीश ने आरोपियों से दो बार मुलाकात की, तभी यह निर्णय तय हो गया था, ऐसा कहते हूए उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर महाराष्ट्र में अनिश्चितता का माहौल होता तो प्रधानमंत्री नहीं आते, क्योंकि परिणाम तो अपेक्षित था, लेकिन पता नहीं। अध्यक्ष का दावोस दौरे की घोषणा पहले ही हो चुकी है यानी ये सेटिंग थी, ये मैच फिक्स था।

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