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सवाल हमारे… जवाब आपके!

नई दिल्ली में इन दिनों ‘शंघाई
कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन’ का सम्मेलन चल रहा है, जिसमें शामिल होने के लिए पाकिस्तानी फौज का एक दल आया हुआ है। पाकिस्तानी फौज ही हिंदुस्थान में आतंकवादी भेजती है। ऐसे में केंद्र  सरकार का पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों को अपने देश में आने की अनुमति देना क्या जायज है?

एक बड़ा धोखा
केंद्र  सरकार अपनी उल-जुलूल नीतियों के कारण हमेशा विवादों में रहती है। एक तरफ पाकिस्तान हमारे देश में आतंकवादियों को भेजकर कश्मीर घाटी में टारगेट किलिंग को अंजाम दे रहा है, वहीं उनके सैन्य अधिकारियों को यहां सम्मेलन में आने की अनुमति देना हास्यास्पद है। यह बिल्कुल भी जायज नहीं। यह देशवासियों के साथ एक बड़ा धोखा है।
-मनीषचंद्र मिश्र, सीतामढ़ी, (बिहार)

अनुमति देना ठीक नहीं
पाकिस्तानी फौज हिंदुस्थान में आतंकवादियों को भेजकर देश के निरपराध लोगों की हत्या करवाती है। पाकिस्तानी सेना अधिकारियों को मोदी सरकार द्वारा दी गई अनुमति ठीक नहीं है। यह देश की सुरक्षा की दृष्टि से ठीक नहीं है।
-सलीम नागानी, मुंबई

चर्चा करना गलत है
पाकिस्तान क्रूरतापूर्वक हमारे सैनिकों को धूर्तता से मारता है। पाकिस्तानी फौज आतंकी भेजकर हमारे नागरिकों को मरवाती है। ऐसे लोगों का बहिष्कार करने की आवश्यकता है। ऐसे धोखेबाज देश पाकिस्तान के साथ दिल्ली में उनके फौजियों के साथ चर्चा करना गलत है।
-रमेश यादव, उल्हासनगर

सुरक्षा के लिए घातक
पाकिस्तान आए दिन हमारे साथ घात करता है। मोदी सरकार के लिए शर्मनाक बात है। प्रतिबंध लगाने के बदले उनके फौजी अधिकारियों को बुलाकर सम्मेलन किया जा रहा है। यह देश की सुरक्षा के लिए बहुत ही घातक संकेत है।
-ज्योति मिश्रा, बदलापुर

 रिश्ता नहीं रखना चाहिए
इतिहास गवाह रहा है कि पाकिस्तान ने हमेशा हिंदुस्थान के साथ नीचता की है। ऐसे में पाकिस्तानी सेना के एक दल को हिंदुस्थान बुलाना खतरा साबित हो सकता है। पाकिस्तान से कोई रिश्ता रखना ही नहीं चाहिए।
-सुरेंद्र उपाध्याय, ठाणे

गलत निर्णय है
केंद्र  में बैठी मोदी सरकार ने पाकिस्तान को सबक सिखाने का वादा कर लोकसभा चुनाव में मत मांगा था। अब पाकिस्तान की सेना के जवानों को हिंदुस्थान बुलाना बेहद गलत बात है। हमें पाकिस्तान से सारे संबंध खत्म कर देना चाहिए।
-दीपा साबले, टिटवाला

आज का सवाल?
सेना में भर्ती के नाम पर मोदी सरकार ने युवाओं को नौकरी देने की घोषणा की है। पर यह नौकरी सिर्फ ४ साल की होगी और इसके बाद उनका क्या होगा, इस पर सरकार खामोश है। क्या यह बेरोजगारों को झुनझुना थमाना नहीं कहा जाएगा? अब इसके विरोध में देश के कई शहरों में युवा रोड पर उतर आए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं।
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