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सवाल हमारे… जवाब आपके!

मोदी सरकार ने काले धन पर लगाम लगाने के लिए नोटबंदी की थी। अब स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार २०२१ में हिंदुस्थानियों ने कुल ३०,५०० करोड़ रुपए वहां जमा कराए, जो २०२० से ५० फीसदी ज्यादा है। ऐसे में क्या नोटबंदी का उद्देश्य पूरा हुआ?

लचर व्यवस्था जवाबदार
मोदी सरकार ने काले धन पर लगाम लगाने के लिए नोटबंदी की थी। इसके बावजूद विदेशी बैंकों में आज भी रुपयों का जमा करना यह साबित करता है कि कहीं न कहीं देश की लचर व्यवस्था जवाबदार है।
-रमापति मिश्रा, उल्हासनगर

 अदृश्य भ्रष्टाचार
मोदी सरकार की नोटबंदी योजना को धता बताती यह खबर, तमाम हिंदुस्थानी लोगों को निराश करनेवाली है। कालाधन निकालने की बजाय पचास प्रतिशत की बढ़ोतरी अदृश्य भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा सबूत है।
-राजेश वर्मा, नालासोपारा

जल्दबाजी का परिणाम
केंद्र सरकार बहुत सारे फैसले  ऐसे लेती है जिसमें जल्दबाजी दिखती है। ऐसी जल्दबाजी का परिणाम भी शून्य होता है। नोटबंदी भी इसका एक उदाहरण है। ताजे आंकड़े नोटबंदी की विफलता को बयां कर रहे हैं।
-रामनाथ यादव, कांदिवली

नोटबंदी पर सरकार नाकाम
नोटबंदी में अपने ही पैसे हासिल करने के लिए कई लोगों ने अपनी जानें गंवा दी। जान गंवाने के बाद भी स्विट्जरलैंड में काला धन जमा हो रहा है। जिसका साफ अर्थ है कि काले धन पर सरकार नाकाम रही है।
-रमण चौधरी, विरार

कई जानें चली गईं 
नोटबंदी में कई गरीब लोगों ने अपनी जानें गंवा दी। केंद्र सरकार ने जब भी कोई बड़ा निर्णय लिया, आम जनता को उसका नुकसान हुआ। देश को नई सरकार की जरूरत है।
-यश धादवड, नई मुंबई

सरकार का चुनावी जुमले
नोटबंदी भी मोदी सरकार के चुनावी जुमले की तरह ही था। नोटबंदी से कालेधन पर अंकुश लगने की बजाय इसमें और वृद्धि होना, नोटबंदी की विफलता का सबूत है।
-सुबोध मिश्रा, भायंदर

दावा गलत था
काले धन पर रोक लगाने का दावा गलत था। स्विस बैंक द्वारा जारी आंकड़े यह बताने के लिए काफी है। केंद्र सरकार कालेधन पर अंकुश लगाने में असफल साबित हो रही है।
-अमित आर. सिंह, नालासोपारा

 दीपक तले अंधेरा
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा कालेधन की रोक थाम के लिए किए गए नोटबंदी दीपक तले अंधेरा साबित हो रहा है। २०२१ में जारी लोगों ने २०२० से ५० फीसदी ज्यादा पैसा जमा कराया जो इस बात का पुख्ता सबूत है।
-विनोद कुमार चौबे, बांद्रा

आज का सवाल?
देश भर में ‘अग्निवीर’ योजना के खिलाफ हो रहे जोरदार विरोध-प्रदर्शन के बाद अब केंद्र सरकार उसमें रोज संशोधन पेश कर रही है। इसका मतलब है कि सरकार ने बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में ये योजना बनाकर इसे लागू किया है। क्या केंद्र सरकार का ये तानाशाही रवैया उचित है?
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