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सवाल हमारे … जवाब आपके!

देश भर में ‘अग्निवीर’ योजना के खिलाफ हो रहे जोरदार विरोध-प्रदर्शन के बाद अब केंद्र सरकार उसमें रोज संशोधन पेश कर रही है। इसका मतलब है कि सरकार ने बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में इस योजना को बनाकर इसे लागू किया है। क्या केंद्र  सरकार का ये तानाशाही रवैया उचित है?

सरासर गलत है
केंद्र  सरकार का यह रवैया बिल्कुल भी उचित नहीं है। पहले बिना सोचे-समझे, बिना विपक्ष को विश्वास में लिए अग्निवीर योजना लागू करना। फिर विरोध-प्रदर्शन के बाद संशोधन की कवायद करना, यह सरासर गलत है। विरोध-प्रदर्शन के कारण जान-माल और राष्ट्रीय संपत्ति की जो क्षति हुई उसकी जिम्मेदार केंद्र सरकार ही कही जाएगी।
-चंद्रेश पांडे, भायंदर

मनमानियों का नतीजा
केंद्र सरकार की मनमानियों का ही यह नतीजा है कि सारा देश आंदोलन की आग में जल रहा है। बिना सोचे-समझे उठाए गए कदम की वजह से ही यह सब हो रहा है।
-सुनील शर्मा, अंबरनाथ

बेरोजगारी और बढ़ेगी
अग्निवीर योजना से सेना में भर्ती करने का मतलब है सेना में निविदा पद्धति लागू की जा रही है। देश के बेरोजगार युवकों को चार साल की नौकरी देने का मतलब है और भी बेरोजगारी बढ़ाना। केंद्र को कोई भी योजना लागू करने से पहले विचार करना चाहिए।
-प्रतीक श्रीवास्तव, मरवट (यूपी)

युवाओं के साथ मजाक
देश का बेरोजगार युवक यदि हिंसा पर उतारू है तो उसकी जिम्मेदार केंद्र की मोदी सरकार ही है। चार साल की नौकरी देकर सरकार देश के युवाओं के साथ मजाक कर रही है।
-त्रिभुवन सिंह, कल्याण

संपत्ति का नुकसान
बिना सोचे-समझे कोई भी योजना लागू करना कितना भारी पड़ा, यह साफ-साफ दिखाई दे रहा है। अग्र सोची सदा सुखी ये कहावत गलत नहीं है। देश की संपत्ति का जो नुकसान हुआ है, कहीं न कहीं इसका खामियाजा आम जनता को ही भुगतना पड़ेगा।
-गोपाल झा, तारापुर

तानाशाही रवैया
बिना सोचे-समझे या कहेें लोगों को बिना विश्वास में लिए अग्निवीर जैसी योजना शुरू कर दी गई। उसका परिणाम है कि युवकों ने देश में उग्र आंदोलन-प्रदर्शन किए। सैकड़ों रेल के डिब्बे व अन्य वाहन जलाए गए। राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान किया गया। अब केंद्र  सरकार अग्निवीर योजना में सुधार कर रही है। यदि सरकार पहले ही ऐसे कदम उठाती तो राष्ट्र का इतना नुकसान नहीं हुआ होता। सरकार की इस तरह की तानाशाही भी उचित नहीं है।
-मनोज सिंह, उल्हासनगर

आज का सवाल?
मोदी सरकार देश के विकास का ढोल पीट रही है पर धरातल पर हालत कुछ और ही है। यूएन की सहायक महासचिव और निदेशक कन्नी विग्नराजा ने इसकी पोल खोलते हुए कहा है कि ‘हिंदुस्थान में पोषण, मातृ और शिशु मृत्यु दर की हालत ठीक नहीं है। इसे तेज गति से सुधारने की जरूरत है।
आप क्या सोचते हैं? तुरंत लिखकर भेजें या मोबाइल नं. ९३२४१७६७६९ पर व्हॉट्सऐप करें।

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