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सवाल हमारे… जवाब आपके!

केंद्र सरकार आम जनमानस का विचार किए बिना योजनाओं को अमल में लाती है, जिसके कारण ये योजनाएं पूरी तरह से फेल  हो जाती हैं। केंद्र की प्राइवेट रेल योजना भी पूरी तरह से फ्लॉप हो गई। ये ट्रेन करोड़ों रुपए के घाटे में चल रही है। ऐसे में आईआरसीटीसी ने रेलवे को पत्र लिखकर गुहार लगाई है कि रेलवे को मिलनेवाला चार्ज माफ कर दिया जाए। इस पर आपकी क्या राय है। हमें लिख भेजें।

  • भारतीय रेलवे की निजी रेल सेवा फ्लॉप
    भाजपा ने भविष्य में रेलवे सेवा के निजीकरण के लिए ट्रायल के तौर पर कई निजी रेल सेवा शुरू की थी। परंतु निजी रेल सेवा फ्लॉप हो गई है और करोड़ों रुपए के घाटे में है। अब रेलवे मंत्रालय को दी जाने वाली रकम घाटा का हवाला देकर माफ करने की मांग आईआरटीसी ने की है।
    -राजेंद्र पाटील, उल्हासनगर
  • आईआरटीसी छूट पाना चाहती है
    केंद्र  सरकार ने रेलवे सेवा में कुछ प्राइवेट गाड़ियों को शामिल किया है। इन निजी गाड़ियों को आईआरटीसी देखती है। अब कंपनी ने घाटे का रोना रो कर भारतीय रेलवे छूट पाना चाहती है। सरकार को पहले ही इस योजना पर विचार कर फिर शुरू करनी चाहिए थी।
    – उबाले, बदलापुर।
  • मांग जायज है
    गंगा नदी के सफाई अभियान से जुड़ी ‘नमामि गंगे’ की विफलता की चर्चा अभी चल ही रही थी कि प्राइवेट रेल योजना के भी घाटे में चलने की बात सामने आ गई है। इससे तो यही प्रतीत होता है कि केंद्र सरकार बिना सोच-विचार के ही योजनाओं को अमल में लाती है। प्राइवेट रेल योजना के घाटे को देखते हुए आईआरसीटीसी द्वारा रेलवे को मिलने वाला चार्ज माफ करने की गुहार जायज ही लग रही है।
    – राजू म्हात्रे, भायंदर
  • बिना सोचे-समझे लिया निर्णय
    केंद्र  सरकार बिना सोचे-समझे काम कर रही है। यही वजह है कि उसकी हर योजना फ्लॉप हो रही है। और होने वाला घाटा आम जनता से वसूला जा रहा है।
    – सोनू यादव, कल्याण
  • इसी वजह से बंद हुईं रियायतें
    रेलवे का यही घाटा आम यात्रियों को मिलने वाली सहूलियतों को बंद कर पूरा किया जा रहा है। यहां तक कि वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली छूट भी रोक दी गई है।
    – अभिमन्यु सिंह, डोंबिवली
  • रेलवे को डुबाने का काम शुरू है
    केंद्र की मोदी सरकार बिना सोचे-समझे योजनाओं को लागू करती है, जिसका परिणाम यह है कि उनकी योजनाएं असफल साबित हो रही हैं। अब रेलवे को भी डुबाने काम शुरू हो गया है। केंद्र को इस बारे में मंथन करने की जरूरत है।
    – अभय शुक्ला, अंबरनाथ
  • आज का सवाल?
    दिल्ली बार-बार महाराष्ट्र का अपमान करने से बाज नहीं आ रही है। दिल्ली के दूत राज्यपाल अक्सर ऐसा करते रहते हैं और विरोध होने के बाद माफी मांग लेते हैं। अब कल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को नीति आयोग की बैठक के बाद हुए फोटो सेशन में सबसे पीछे खड़ा कर महाराष्ट्र का अपमान किया गया। क्या लोकतंत्र में इस तरह की जानबूझकर की गई हरकत ठीक है?
    आप क्या सोचते हैं? तुरंत लिखकर भेजें या मोबाइल नं. ९३२४१७६७६९ पर व्हॉट्सऐप करें।

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