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सवाल हमारे…जवाब आपके!

दिल्ली बार-बार महाराष्ट्र का अपमान करने से बाज नहीं आ रही है। दिल्ली के दूत राज्यपाल अक्सर ऐसा करते रहते हैं और विरोध होने के बाद माफी मांग लेते हैं। अब कल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को नीति आयोग की बैठक के बाद हुए फोटो सेशन में सबसे पीछे खड़ा कर महाराष्ट्र का अपमान किया गया। क्या लोकतंत्र में इस तरह की जानबूझकर की गई हरकत ठीक है?

  • शिंदे को नहीं दिखी महाराष्ट्र की अस्मिता
    एकनाथ शिंदे को द्वारा महाविकास आघाड़ी में शामिल होना अपमान लग रहा था लेकिन दिल्ली के दरबार में पिछली पंक्ति में खड़ा होना शायद गौरवांवित महसूस करना लगता होगा। अब इनको महाराष्ट्र की अस्मिता नहीं दिख रही क्या?
    अभिजीत सिंह, कल्याण
  • महाराष्ट्र का अपमान भाजपा को चुकाना होगा
    केंद्र सरकार द्वारा बार-बार महाराष्ट्र के साथ किए जा रहे इस दुव्र्यवहार को महाराष्ट्र की जनता कभी माफ नहीं करेगी। महाराष्ट्र के भाजपा विधायक यह क्यों भूल जाते हैं कि वे भी इसी महाराष्ट्र से हैं। कल इसी महाराष्ट्र में उन्हें वोटों की खातिर जनता के बीच जाना पड़ेगा। महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि है। भाजपाइयों द्वारा किए जा रहे अपमान का बदला उन्हें चुकाना ही पड़ेगा।
    परेश बैंदूर, अंधेरी
  • महाराष्ट्र का अपमान बर्दाश्त नहीं
    जिस महाराष्ट्र से ३३ प्रतिशत टैक्स और १८ प्रतिशत जीएसटी केंद्र सरकार लेती है, उसी राज्य के मुख्यमंत्री को सबसे पीछे की कतार में खड़ा करके रखा जाता है, ऐसा अपमान बर्दाश्त के बाहर है। जब केंद्र सरकार सबसे ज्यादा टैक्स महाराष्ट्र से वसूल करती है तो उस राज्य के मुख्यमंत्री को सबसे पीछे खड़ा करना कैसे बर्दाश्त के बाहर है।
    राजेश बी. गुप्ता, मलबार हिल
  • केंद्र की विकृत मानसिकता
    केंद्र  यदि इस तरह की विकृत मानसिकता का परिचय दे तो यह समूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का निरादर है। नीति आयोग को समानता की नीति का पहले स्वयं पालन करना होगा और ऐसी तुच्छ हरकतें भविष्य में रोकनी होंगी।
    डॉ. वासिफ काजी, इंदौर
  • दुर्भाग्यपूर्ण व निंदनीय
    राज्यपाल द्वारा बार-बार महाराष्ट्र राज्य को अपमानित करनेवाले वक्तव्य देना, नीति आयोग की बैठक के बाद राज्य के मुख्यमंत्री को पिछली पंक्ति में खड़ा किया जाना, बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
    विलास भोईर, नायगांव
  • एक मंत्री बाकी सारे संतरी
    एकनाथ शिंदे को अब समझ आ गया होगा कि उनका बीजेपी में सम्मान तब तक ही हुआ करता था जब तक वह शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ थे। अब तो बस एक मंत्री बाकी सारे संतरी। मुखिया के बिना घर चला पाना मुश्किल है राज्य चलाना दूर की बात है।
    राजेश सिन्हा, कल्याण
  • महाराष्ट्र की जनता की बेइज्जती
    देश को सबसे ज्यादा कर देनेवाले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को पिछली पंक्ति में खड़ा करना एक तरह से महाराष्ट्र की जनता की बेइज्जती है और मेरा स्पष्ट मत है कि यह बेइज्जती एकनाथ शिंदे की वजह से हुई है। केंद्र एकनाथ शिंदे को महज एक बकरा मानता है, जिसके चलते महाराष्ट्र की सत्ता मिली है।
    राजन ओझा, अंबरनाथ
  • सोची-समझी हरकत
    दिल्ली द्वारा बार-बार महाराष्ट्र का अपमान करना एक सोची-समझी हरकत है, इससे महाराष्ट्र के नेताओ को सबक लेना चाहिए। महाराष्ट्र की देश के अग्रणी राज्य में गिनती होती है, बार-बार इसका अपमान करना निंदनीय है
    आशुतोष मिश्रा, मीरारोड
  • आज का सवाल?
    वित्त मंत्रालय की टैक्स रिसर्च यूनिट ने एक सर्कुलर  जारी कर कहा है कि ग्राहक ने रेल टिकट बुकिंग करते समय जिस दर से जीएसटी अदा की थी, टिकट के कैंसल  करने पर उसे उसी दर से कैंसिलेशन चार्ज पर जीएसटी देनी होगी। सरकार के इस रवैए से आप क्या कहेंगे? तुरंत लिखकर भेजें या मोबाइल नं. ९३२४१७६७६९ पर व्हॉट्सऐप करें।

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