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सवाल हमारे : जवाब आपके !

केंद्र की सरकार आजादी का महोत्सव मनाने में मगन है। उधर पाकिस्तान कश्मीर में आतंकी हमलों को अंजाम दे रहा है। लेकिन मोदी सरकार का ध्यान उस पर नहीं जा रहा है।

  • गूंगी-बहरी है केंद्र सरकार
    आजादी का महोत्सव मनाने के साथ- साथ देश की सीमाओं की सुरक्षा पर भी केंद्र सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है। पाकिस्तान कश्मीर में आतंकी हमलों को अंजाम दे रहा है, प्रतिदिन जवानों के शहीद होने की खबरें दिल को झकझोर रही है। वहीं केंद्र की मोदी सरकार महोत्सव के जश्न में गूंगी-बहरी बनी हुई है। आखिर यह कैसा देश प्रेम है..?
    रवींद्र उपाध्याय, भायंदर
  • पाकिस्तान को दें मुंहतोड़ जवाब
    पाकिस्तान की नापाक हरकतों को अब मुंहतोड़ जवाब देने का वक्त आ चुका है, केंद्र सरकार को चाहिए कि पाकिस्तान को दुनिया के नक्शे से आजादी दे दे।
    माधवी श्रीवास्तव, कल्याण
  • पाकिस्तान के मुद्दे पर चुप्पी क्यों?
    पाकिस्तान की हरकतें अब बढ़ती जा रही हैं, २०१४ से पहले मोदी जी जिस तरह की बातें कर कांग्रेस को कोसा करते थे, अब अपनी ही बातों पर अमल क्यों नहीं करते हैं, पाकिस्तान के मामले पर चुप्पी क्यों है?
    विनोद तिवारी, डोंबिवली
  • आतंकवाद का करें सफाया
    आज इतने दिन हो गए, पाकिस्तान आतंकवादी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। केंद्र की मोदी सरकार को चाहिए आतंकवाद को समूल नष्ट करने में जी-जान लगा दें। एक तरफ देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ आतंकी जवानों को शहीद कर रहे है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।
    गुलाब पवार, उल्हासनगर
  • आतंकवाद के खात्मे की जरूरत
    एक समय था पाकिस्तानी आतंकवाद के खिलाफ भाजपा जमकर विरोध करती थी। पर जब भाजपा की केंद्र में सत्ता आई तो सैनिकों पर आतंकी हमला शुरू है। सैनिक शहीद हो रहे हैं। आतंकवाद को खत्म करने की जरूरत है।
    सुभद्रा चव्हाण, अंबरनाथ
  • रोके आतंकी हमला
    बड़े धूमधाम आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। वहीं पाकिस्तान कश्मीर में आतंकवादी हमला करवा रहा है जिससे हर रोज हमारे कई जवान शहीद हो रहे हैं। आतंकियों का सफाया करके ही जवानों के शहीद होने का क्रम रोका जा सकता है, तभी सही अर्थों में आजादी का अमृत महोत्सव होगा। केंद्र सरकार को आतंकवादियों के मुद्दे को गंभीरता से लेकर कश्मीर में हर रोज हो रहे आतंकी हमले को रोकने की आवश्यकता है।
    संतोष पाटील, वालीव वसई
  • आज का सवाल?
    पिछले दो सालों से सेना में भर्ती नहीं हुई है। सैनिकों की भारी कमी है। इसके बावजूद केंद्र सरकार दो लाख सैनिकों को बाहर करने की तैयारी में है। देश की सुरक्षा से समझौता करना घातक साबित हो सकता है, जिसके भयंकर परिणाम हो सकते हैं। इस पर आपका क्या कहना है?
    आप क्या सोचते हैं? तुरंत लिखकर भेजें या मोबाइल नं. ९३२४१७६७६९ पर व्हॉट्सऐप करें।

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