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सवाल हमारे : जवाब आपके!

केंद्र  सरकार की नीयत पर अक्सर लोग शंका व्यक्त करते रहते हैं। स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद कोकण में रिफाइनरी लगाने की जिद केंद्र  सरकार क्यों कर रही है? किसे फायदा पहुंचाना चाहती है?

  • स्थानीय लोगों को मिले प्राथमिकता
    कोकण में रिफाइनरी और उपकरणों के माध्यम से धन का पुनर्वितरण करना एक कारण हो सकता है। कोकण में नगरीय विकास तब होगा जब उस रिफाइनरी में काम करनेवाले स्थानीय लोग होंगे वर्ना सरकार केवल कई बसेरों को तोड़ेगी जो भ्रष्टाचार, चोरी, डकैती को बढ़ावा देगी।
    -जेबा अख्तर, सुल्तानपुर यूपी
  • संवेदनहीन सरकार
    भूखे भेड़िये को केवल अपना शिकार दिखाई देता है। उसमें संवेदनशीलता नाम मात्र के लिए भी नहीं होती है। ठीक उसी तरह का प्रभाव केंद्र सरकार पर भी दिखाई पड़ रहा है। कोकण में रिफाइनरी लगा कर अपने पिछलग्गुओं को हड्डियां चूसने के लिए देना चाहती है और अपनी झोली भरना चाहती है।
    -रत्नेश कुमार पाण्डेय, मुंबई
  • किसानों के साथ धोखा
    कोकण हो या अन्य प्रदेश सब जगह यही हाल है, कारण यह है कि स्थानीयों को रोजगार से वंचित रखना किसान अपनी जमीन देने के बाद भी धोखा पाता है। इसलिए हमारे प्रदेश में ऐसे उद्योगों का जगह-जगह ग्रामीणों द्वारा विरोध किया जा रहा है।
    -परमानंद वर्मा
  • योजना जनहित में या स्वहित में
    केंद्र कोंकण में रिफाइनरी तो राज्य सरकार आरे कालोनी में पेड़ काट कर मेट्रो स्टेशन बनाने पर जोर दे रही है। जबकि लोगों का पुरजोर विरोध है। ये दोनों योजनाएं जनहित में बनाई जा रही हैं या स्वहित में समझ में नहीं आ रहा है। दोनों सरकारों की मंशा किसको फायदा पहुंचाने की हैं?
    -संतोष पांडेय, उल्हासनगर।
  • स्थानीय लोगों को मिले फायदा
    कोकण में रिफाइनरी लगाने से ट्रांसपोर्ट करना आसान होगा और कोई भी कार्य चालू करने से पहले उसका विरोध होता ही है कुछ दिन विरोध होगा, इसके बाद सब सामान्य हो जाएगा। जो आज विरोध कर रहे हैं कल उन्हीं के घर परिवारवाले उसमें नौकरी करके अपने घर परिवार को पालेंगे। इसमें सरकार एवं स्थानीय ग्रामीणों का रिफाइनरी लगने से फायदा है।
    -महेश गुप्ता, जौनपुर
  • भाजपा की करनी पर संदेह!
    आज कई साल से प्रदूषण को लेकर कोकणवासी रिफाइनरी प्लांट का विरोध कर रहे हैं। उग्र आंदोलन किया जा रहा है, इसके बावजूद लोगों की भावना का कद्र न करते हुए उसका दमन किया जा रहा है। केंद्र सरकार जबरन प्लांट लगाने पर अड़ी है। ऐसा क्यों कर रही है? इस प्लांट से कोकणवासियों का फायदा है या सरकार के लोगों का?
    -प्रकाश पाटील, बदलापुर
  • केंद्र की हिटलरशाही
    केंद्र सरकार बिना आम जनता की सहमति या उसके मनोभाव को जाने ही अपने निर्णय थोपती रहती है। इससे जाहिर होता है कि केंद्र सरकार हिटलरशाही शासन का अनुकरण कर रही है। जो कि देश के लिए चिंताजनक है।
    -राम कुमार मिश्रा, भायंदर
  • केंद्र सरकार की मनमानी
    करूंगा वही जो मन में होगा, किसी के हित-अनहित से कोई मतलब नहीं, इसी फॉर्मूले पर केंद्र सरकार के कुछ फैसले होते हैं। कोकण की रिफाइनरी इसका उदाहरण है। किसी एक को फायदा पहुंचाने के लिए हजारों लोगों का नुकसान हो, केंद्र सरकार को चलेगा।
    -मयंक सिंह, मीरा रोड
  • सौंदर्य बिगाड़ने की साजिश

रिफाइनरी का विरोध हो या फिर जनहित का कोई मामला हो केंद्र को कोई फर्क नहीं पड़ता। कुछ लोगों के फायदे के खातिर कोंकण का सौंदर्य बिगाड़ने का काम हो रहा है।
-रेणुका श्रीवास्तव, डोंबिवली

  • जनता को विश्वास में लें
    रिफायनरी का विरोध यदि स्थानीय जनता कर रही है तो जरूर कोई बात होगी। ऐसे में केंद्र को चाहिए कि कोकणवासियों की बात भी सुनी जाए। उनको विश्वास में लेकर ही आगे काम करें।
    -घनश्याम मिश्रा, ठाणे
  • ‘अपना काम बनता भाड़ में जाय जनता’
    कोकण में रिफाइनरी का विरोध का केंद्र की जिद्दी सरकार पर कोई फर्क  नहीं पड़ता है। केंद्र के ऊपर यह कहावत फिट बैठती है ‘अपना काम बनता भाड़ में जाय जनता’
    -पल्लवी माथुर, बंगलुरु

आज का सवाल?
एसी लोकल को लेकर यात्रियों का विरोध आए दिन सामने आ रहा है। रेग्युलर टाइम में एसी लोकल चलाने से प्लेटफॉर्मों पर यात्रियों की भीड़ काफी बढ़ जाती है, क्योंकि इससे सामान्य लोकल का अंतराल काफी बढ़ जाता है। रेलवे की इस मनमानी पर आप क्या कहेंगे?
आप क्या सोचते हैं? तुरंत लिखकर भेजें या मोबाइल नं. ९३२४१७६७६९ पर व्हॉट्सऐप करें।

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