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सवाल हमारे…जवाब आपके!

केंद्र सरकार की गलत नीतियों के चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है। औंधेमुंह गिरता रुपया देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ को तोड़ने का काम कर रहा है। आज आलम यह है कि डॉलर के मुकाबले रुपया ८०.१५ पर आ गया है।

  • केंद्र की गलत विदेशी नीति
    अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए का लगातार कमजोर होना केंद्र सरकार के असफल व गलत विदेशी नीति का परिणाम है। जिससे देश का लगातार नुकसान हो रहा है। सरकार यदि कमजोर होते भारतीय रुपए को सम्मान नहीं दिला सकती तो वित्त मंत्री को बदल देना चाहिए।
    महेंद्र प्रताप सिंह, भिवंडी
  • सरकार को गंभीर होना पड़ेगा
    केंद्र सरकार हिंदू-मुस्लिम से बाहर नहीं आ रही है। कमरतोड़ महंगाई गिरते रुपए का नतीजा है, इस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा। यदि भारतीय रुपए का यही हाल रहा तो देश में भुखमरी आने से कोई रोक नहीं सकता है।
    शुभम पांडे, सायन
  • असफल पीएम मोदी
    केंद्र सरकार को रुपए को मजबूती प्रदान करने के लिए आवश्यक कदम उठाना चाहिए था लेकिन खराब आर्थिक नीतियों के चलते पीएम मोदी इस मामले में पूरी तरह असफल साबित हो रहे हैं।
    उमेश एस पांडेय, ठाणे
  • गलत नीतियों का खामियाजा
    डॉलर के मुकाबले रुपया गिर क्यों रहा है? एक डॉलर की वैल्यू आज सवा अस्सी रुपए के बराबर है। साफ जाहिर हो रहा है कि कहीं न कहीं मोदी सरकार की गलत नीतियों के चलते रुपए का कद विदेश में कम हो रहा है।
    अखिलेश यादव, उल्हासनगर।
  • चरमराती अर्थव्यवस्था
    दिन-प्रतिदिन डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत घटती जा रही है जो अब धीरे-धीरे ८०.१५ तक पहुंच गई है। इससे महंगाई में बेतहाशा वृद्धि हो रही,अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। यह पूरी तरह से केंद्र सरकार और उसकी नीतियों की विफलता को दर्शाती है।
    अजीम तांबोली, भायंदर
  • भयंकर मंदी का संकेत
    देश की अर्थव्यवस्था वैसे ही चौपट हुई पड़ी है। उस पर डॉलर के मुकाबले रुपए का गिरना भयंकर मंदी का संकेत देता है। केंद्र को विचार करना ही होगा।
    विजय पाटील, अंबरनाथ
  • केंद्र जनता को बरगला रही है
    केंद्र सरकार वैश्विक मंदी का बहाना करके जनता को बरगला रही है। देश की वित्तमंत्री तो मानों कुछ जानती ही नहीं हैं। उनके हिसाब से सब कुछ ठीक है। जबकि डॉलर की कीमतें आसमान छू रही है।
    हर्षिता गौड़, डोंबिवली
  • आज का सवाल?
    केंद्र की सत्ता संभालने के बाद मोदी सरकार ने अच्छे दिन के सपने दिखाए थे। परंतु आज देश में साल दर साल आत्महत्याओं का मामला बढ़ता ही जा रहा है। यह आंकड़ा देश में रोजाना ४५० पर पहुंच गया है। देश में हो रही आत्महत्याओं से केंद्र की कुंभकर्णी नींद कब खुलेगी?
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